दिल्ली: राजपाल यादव से जुड़े चेक बाउंस मामले में माधव गोपाल अग्रवाल ने पहली बार मीडिया से इस तरह बातचीत की. यह वही बिजनेसमैन हैं जिनकी कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड है. इसी कंपनी ने 2010 में राजपाल यादव को फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए 5 करोड़ रुपये दिए थे. अब उन्होंने पहली बार कैमरे के सामने आकर अपनी पूरी बात रखी है. दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में राजपाल यादव को अंतरिम जमानत दी है. इसी बीच माधव गोपाल अग्रवाल ने न्यूज पिंच को दिए इंटरव्यू में बताया कि वे सांसद मिथिलेश कुमार कठेरिया के जरिए राजपाल से मिले थे. राजपाल ने कहा था कि फिल्म लगभग पूरी हो चुकी है और अगर तुरंत फंडिंग नहीं मिली तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा.
राजपाल यादव की पत्नी ने पैसे के लिए माधव अग्रवाल को किया इमोशनल–/mayapuri/media/post_attachments/marathi/sites/default/files/2026/02/17/948410-rajpal-yadav-loan-858140.jpg)
शुरुआत में माधव ने पैसे देने से इनकार कर दिया, लेकिन राजपाल की पत्नी राधा यादव के बार-बार मैसेज और इमोशनल अपील के बाद वे मान गए. उन्होंने कहा कि वे खुद भावुक होकर मदद के लिए राजी हुए. माधव गोपाल अग्रवाल ने बताया कि एग्रीमेंट में साफ लिखा था कि फिल्म की सफलता, सेंसर सर्टिफिकेट या किसी बाहरी समस्या से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. राजपाल को तय रकम तय समय पर लौटानी होगी. साथ ही उन्होंने पर्सनल गारंटी भी दी थी. माधव ने जोर देकर कहा कि यह लोन था, निवेश नहीं, क्योंकि निवेश में पर्सनल गारंटी या चेक नहीं होते.
राजपाल ने कहा कि रिलीज तक पैसे नहीं दे सकते, तो माधव ने सेटलमेंट किया और रोक हटवाई. लेकिन फिल्म फ्लॉप रही. 2013 में जब कोई हल नहीं निकला तो माधव कोर्ट गए. कोर्ट के कहने पर 10.40 करोड़ पर सेटलमेंट हुआ. राजपाल ने इतने के चेक जमा किए, लेकिन वे सभी बाउंस हो गए, जिससे मामला और आगे बढ़ा.
मैं अपने पैसों के लिए बच्चों की तरह रोया—-
माधव ने भावुक होकर बताया कि शुरुआती दिनों में वे राजपाल के घर गए और बच्चों की तरह रोए, क्योंकि वे खुद इतने बड़े नहीं थे और दूसरों से उधार लेकर पैसे दिए थे. वे गिड़गिड़ाते रहे कि जो डेट बताओगे, उसी पर नया एग्रीमेंट बनवा लूंगा, लेकिन हर बार चेक बाउंस होने का वादा टूटा.
राजपाल यादव के जेल जाने पर माधव का कहना है कि इससे उनकी इज्जत नहीं बढ़ी. वे बिजनेसमैन हैं, उन्हें बस अपने पैसे चाहिए. अब कोर्ट का प्रोसेस चल रहा है, वे कुछ नहीं कर सकते.
Author: sarvendra chauhan
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