देश में आधार ने अब लगभग 15 साल का सफर पूरा कर लिया है. सितंबर 2010 को शुरू हुआ यह पहचान पत्र आज 140 करोड़ से ज्यादा लोगों को यूनिक आईडी दे चुका है. लगभग हर घर में किसी न किसी के पास आधार मौजूद है और सरकारी योजनाओं से लेकर बैंकिंग तक, इसकी भूमिका रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि फ्री एनरोलमेंट वाली इस खास पहचान आईडी आधार को बनाने में कितना खर्च आता है? आज इस लेख में हम आधार जारी करने वाली संस्था यूआईडीएआई (UIDAI) के मौजूदा सीईओ के हालिया बयान के आधार पर इस पहलू को समझेंगे

इस सवाल का जवाब हाल ही में यूनिक आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (Unique Identification Authority of India – UIDAI) के सीईओ भुवनेश कुमार ने छत्तीसगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान दिया. उन्होंने बताया कि एक आधार (Aadhaar Card) बनाने में औसतन 1.2 डॉलर यानी लगभग 100 रुपये का खर्च आता है.
फ्री आधार में सुधार और अपडेट के लिए जेब पर कितना बोझ
जैसा कि हम सब जानते हैं, आधार (Aadhaar)बनवाना पूरी तरह फ्री है. सरकार ने 5 साल और 15 साल की उम्र पर आधार में बायोमेट्रिक अपडेट (Aadhaar Card Address Update)कराना जरूरी कर रखा है. इसके अलावा UIDAI समय-समय पर लोगों को सलाह देता रहता है कि अगर उनके आधार में पहचान या पते से जुड़े दस्तावेज 10 साल पुराने हो गए हैं, तो उन्हें अपडेट करा लें ताकि जानकारी सही बनी रहे.

बात करें अपडेशन चार्ज की, तो फिलहाल नाम, पता, मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी या जन्मतिथि जैसी जानकारी बदलवाने पर 75 रुपये लगते हैं. वहीं फेस, आंखों की पुतली (आईरिस) और अंगूठे के निशान जैसे बायोमेट्रिक अपडेट के लिए 125 रुपये देने होते हैं. राहत की बात यह है कि 5 से 17 साल तक के बच्चों के लिए जरूरी बायोमेट्रिक अपडेट 30 सितंबर 2026 तक पूरी तरह फ्री रखा गया है, लेकिन यह सुविधा सीमित समय के लिए है.
UIDAI आधार धारकों को यह भी कह रहा है कि वे अपने आधार को फिर से वैध रखने के लिए पहचान (POI) और पते (POA) से जुड़े दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करें. यह काम myAadhaar पोर्टल पर 14 जून 2026 तक बिल्कुल फ्री किया जा सकता है. अगर इसके अलावा पता बदलना हो या नाम, जन्मतिथि जैसी जानकारी में बदलाव करना हो, तो ऐसे मामलों में 75 से 125 रुपये तक का चार्ज देना होगा.

अगर आप myAadhaar पोर्टल के जरिए अपडेट करना चाहते हैं, तो आपका मोबाइल नंबर आधार से लिंक होना जरूरी है.
पहला आधार कब बना?
देश में यूनिक आईडी यानी आधार जनरेट करने का काम सरकारी संस्था UIDAI करती है. जिसकी स्थापना जनवरी 2009 में हुई थी. उस समय यह प्लानिंग कमीशन (Planning Commission) के तहत काम करती थी, जो आज नीति आयोग के नाम से जानी जाती है. UIDAI ने जरूरी नियमों और तकनीकी मानकों, जैसे बायोमेट्रिक डेटा कलेक्शन, तय करने के बाद 29 सितंबर 2010 को पहला आधार नंबर जारी किया गया था. आधार की शुरुआत प्लानिंग कमीशन के दायरे में ही हुई थी. बाद में 2014 में प्लानिंग कमीशन को भंग कर दिया गया और उसकी जगह नीति आयोग (NITI Aayog) का गठन किया गया. प्लानिंग कमीशन की जगह बने नीति आयोग के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं.
आधार के फायदों और हालिया सख्ती पर UIDAI सीईओ ने कहा कि भले ही एक व्यक्ति का आधार बनाने में सरकार को करीब 100 रुपये खर्च करने पड़े हों, लेकिन इसके बाद डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए हुई बचत इस लागत से करीब 40 गुना ज्यादा रही है. यानी जहां एक आधार पर सरकार ने 100 रुपये खर्च किए, वहीं केंद्र और राज्य सरकारें अब तक करीब 4,000 रुपये के बराबर की बचत कर चुकी हैं.
भुवनेश कुमार के मुताबिक, इतनी कम लागत में इतना बड़ा रिटर्न शायद ही किसी और सरकारी निवेश में देखने को मिले. सरकार की यही बचत आगे चलकर सड़कों, पुलों, बिजली, शिक्षा, घर और दूसरी योजनाओं में लगती है, जिसका सीधा फायदा आम लोगों को मिलता है. उन्होंने कहा कि आधार देश की प्रगति और जनहित का एक बड़ा माध्यम साबित हुआ है.
उन्होंने यह भी साफ किया कि इतने बड़े सिस्टम में कुछ अपवाद (exceptions) आना स्वाभाविक है. अगर किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना 0.00001 फीसदी भी हो, तो 140 करोड़ की आबादी में ऐसे मामले सैकड़ों या हजारों में आ सकते हैं. इसी वजह से आधार से जुड़े नियमों, प्रक्रियाओं और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम को लगातार अपडेट और सख्त करने की जरूरत पड़ती है, ताकि दुरुपयोग रोका जा सके.
UIDAI प्रमुख ने बताया कि हाल के वर्षों में आधार एनरोलमेंट प्रक्रिया को सख्त किया गया है, क्योंकि शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ अयोग्य लोग और अवैध प्रवासी आधार बनवाकर आगे कई दूसरे दस्तावेज तैयार कर रहे थे और सरकारी लाभ भी ले रहे थे. समस्या सिर्फ आधार बनवाने की नहीं थी, बल्कि उसके आधार पर नागरिक होने का गलत दावा करने की थी.
इसी वजह से अब 18 साल से ऊपर के नए आवेदकों के लिए स्टेट पोर्टल के जरिए सत्यापन की व्यवस्था की गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जो लोग पहली बार आधार बनवा रहे हैं, वे वास्तव में देश के नागरिक हैं. UIDAI का कहना है कि यह सख्ती जरूरी थी, ताकि आधार की विश्वसनीयता बनी रहे और इसका लाभ सही लोगों तक पहुंचे.
Author: sarvendra chauhan
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