अविमुक्तेश्वरानंद ने क्यों कहा- केशव मौर्य बेहद समझदार हैं,

ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने केशव प्रसाद मौर्य की तारीफ़ कर क्या शंकराचार्य विवाद में फँसे योगी आदित्यनाथ के लिए और मुश्किलें खड़ी कर दी हैं? उन्होंने कहा है कि केशव मौर्य बहुत समझदार हैं और उन्हें मुख्यमंत्री बनना चाहिए। यह बयान माघ मेला 2026 के विवाद के बीच आया है, जिसमें शंकराचार्य और मेला प्रशासन के बीच तनातनी चल रही है। कुछ रिपोर्टों में संकेत दिया गया है कि बीजेपी में ही योगी के ख़िलाफ़ एक गुट इस विवाद में मौक़ा तलाश रहा है। तो क्या केशव मौर्य की तारीफ़ भी उसी ओर इशारा करता है?संगम तट पर माघ मेले के दौरान पालकी विवाद को लेकर धरने पर बैठे ज्योतिष्पीठ  के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सीधे तौर पर ...

इस सवाल को तो कुछ लोग कयास कहकर खारिज कर सकते हैं, लेकिन यह सच है कि शंकराचार्य विवाद में योगी आदित्यनाथ के समर्थन में बीजेपी हाईकमान से समर्थन नहीं मिलता दिख रहा है। यह भी सच है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने केशव प्रसाद मौर्य की तारीफ़ करते हुए कहा है कि उन्होंने एक सही और परिपक्व बयान दिया है और उन्होंने अफसरों की गलती को माना है।माघ मेले में शंकराचार्य जी के साथ हुए दुर्व्यवहार पर जन शक्ति जनता दल के  प्रमुख तेज प्रताप यादव ने खुलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने ...

शंकराचार्य ने कहा, ‘डिप्टी सीएम समझदार हैं, वे समझते हैं कि हमारे अफसरों से गलती हुई है। ऐसे समझदार व्यक्ति को ही मुख्यमंत्री बनना चाहिए। जो व्यक्ति अकड़ में बैठा हुआ हो, उसे मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहिए।’

 

 

केशव मौर्य ने शंकराचार्य को ‘पूज्य’ कहाशंकराचार्य जी के चरणों में नतमस्तक, अपमान करने वालों की होगी  जांच...अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर बोले केशव मौर्य - prayagraj magh mela  swami avimukteshwaranand over ...

यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब माघ मेले में पालकी विवाद को लेकर शंकराचार्य 5 दिनों से धरने पर बैठे हैं। विवाद संगम घाट पर स्नान और माघ मेले की व्यवस्था से जुड़ा है। शंकराचार्य को तेज बुखार भी आया था और उन्हें 5 घंटे वैन में लेटना पड़ा। उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शंकराचार्य को ‘कालनेमि’ कहा है, जबकि केशव मौर्य ने नरम रुख अपनाया। केशव मौर्य ने शंकराचार्य को ‘पूज्य’ कहकर सम्मान दिया और धरना ख़त्म करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वे शंकराचार्य के चरणों में प्रणाम करते हैं और अनुरोध करते हैं कि वे स्नान कर इस विवाद को खत्म करें।

उन्होंने बीजेपी और योगी सरकार को भी घेरा। यह बयान यूपी की सियासत में नया ट्विस्ट लाया है, क्योंकि केशव मौर्य बीजेपी के बड़े नेता हैं और योगी आदित्यनाथ के साथ उनकी जोड़ी लंबे समय से चल रही है।

कुछ लोग इसे योगी बनाम केशव की बहस के रूप में देख रहे हैं। शंकराचार्य का ताज़ा बयान माघ मेले के विवाद को और राजनीतिक रंग दे रहा है। अब देखना है कि इस पर बीजेपी और सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।

 

क्या है पूरा विवाद?स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती क्या असली शंकराचार्य नहीं? समझें पूरी  प्रक्रिया, जानें क्यों कोर्ट पहुंचा विवाद | Swami avimukteshwaranand  saraswati not ...

माघ मेला में मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच विवाद शुरू हुआ। शंकराचार्य का आरोप था कि प्रशासन ने उन्हें पालकी के साथ स्नान करने से रोका और उनका अपमान किया। साधु-संतों की पिटाई करने और उनको शिखा पकड़कर घसीटने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। इस मामले में वे पिछले कई दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं। उनका स्वास्थ्य भी बिगड़ गया और वे वैनिटी वैन में लेटे रहे। शंकराचार्य ने बसंतपंचमी पर भी स्नान नहीं किया।

यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है, खासकर 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले। यह विवाद अब सिर्फ धार्मिक नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक रंग भी ले चुका है। केशव मौर्य और योगी आदित्यनाथ के बीच अलग-अलग बयानों से सत्ताधारी दल भाजपा में मतभेद दिख रहे हैं। शंकराचार्य के बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। अब देखना यह है कि इस पर आगे क्या होता है और क्या केशव मौर्य को लेकर कोई बड़ा फैसला आता है या नहीं।

Dd 24 Now
Author: Dd 24 Now

Leave a Comment

Read More