Mutual Fund Investment Tips: क्या आपके पोर्टफोलियो में बहुत ज्यादा म्यूचुअल फंड हैं? जानिए कितने फंड रखना है सही, वरना घट सकता है रिटर्न
नई दिल्ली: म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले अधिकांश निवेशकों की सोच होती है कि जितने अधिक फंड पोर्टफोलियो में होंगे, जोखिम उतना कम होगा और कमाई की संभावना उतनी ज्यादा बढ़ जाएगी। लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। जरूरत से ज्यादा म्यूचुअल फंड खरीदना कई बार फायदे की बजाय नुकसान का कारण बन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार एक सामान्य रिटेल निवेशक के लिए 3 से 5 म्यूचुअल फंड पर्याप्त होते हैं। इससे अधिक फंड रखने पर पोर्टफोलियो जटिल हो जाता है और वास्तविक डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) का लाभ भी नहीं मिल पाता।
क्यों नुकसानदायक है जरूरत से ज्यादा म्यूचुअल फंड रखना?
कई निवेशक हर नए NFO (New Fund Offer) या पिछले साल बेहतर रिटर्न देने वाले फंड को देखकर उसमें निवेश शुरू कर देते हैं। धीरे-धीरे उनके पोर्टफोलियो में 8, 10 या उससे भी अधिक म्यूचुअल फंड शामिल हो जाते हैं।
हालांकि देखने में यह विविधीकरण (Diversification) लगता है, लेकिन वास्तव में इसे ओवर-डाइवर्सिफिकेशन (Over Diversification) कहा जाता है, जो लंबे समय में रिटर्न पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
पोर्टफोलियो ओवरलैप सबसे बड़ी समस्या
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक ज्यादा इक्विटी म्यूचुअल फंड रखने का सबसे बड़ा नुकसान पोर्टफोलियो ओवरलैप होता है।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी निवेशक ने अलग-अलग AMC के 4 या 5 Flexi Cap या Large Cap फंड खरीदे हैं, तो संभावना है कि सभी फंड्स ने रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC Bank, Infosys, ICICI Bank और TCS जैसी बड़ी कंपनियों में निवेश किया होगा।
ऐसे में अलग-अलग फंड खरीदने के बावजूद आपका पैसा लगभग उन्हीं कंपनियों में बार-बार निवेश हो रहा होता है। इससे वास्तविक विविधीकरण खत्म हो जाता है।
ज्यादा फंड रखने से क्यों घट सकता है रिटर्न?
मान लीजिए आपके पोर्टफोलियो में 12 म्यूचुअल फंड हैं। इनमें से किसी एक फंड ने 50 प्रतिशत का शानदार रिटर्न दिया, लेकिन उसकी हिस्सेदारी आपके कुल निवेश में बहुत कम है।
दूसरी ओर यदि कुछ फंड कमजोर प्रदर्शन करते हैं तो वे अच्छे फंड के मुनाफे को संतुलित कर देते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि पूरे पोर्टफोलियो का रिटर्न औसत रह जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में निवेशक एक्टिव म्यूचुअल फंड की अधिक फीस (Expense Ratio) तो चुकाते हैं, लेकिन रिटर्न कई बार इंडेक्स फंड जैसा ही मिलता है।
ट्रैकिंग भी बन जाती है चुनौती
जितने अधिक म्यूचुअल फंड होंगे, उन्हें नियमित रूप से मॉनिटर करना उतना ही कठिन हो जाएगा।
हर फंड का प्रदर्शन, फंड मैनेजर की रणनीति, निवेश का उद्देश्य और एसेट एलोकेशन अलग होता है। ऐसे में सामान्य निवेशक के लिए सभी फंड्स पर लगातार नजर रखना आसान नहीं होता।
टैक्स और एग्जिट लोड का बढ़ता बोझ
अधिक संख्या में फंड होने का एक और नुकसान टैक्स प्लानिंग में देखने को मिलता है।
जब निवेशक अलग-अलग समय पर अलग-अलग फंड बेचते हैं तो उन्हें विभिन्न फंड्स पर अलग-अलग एग्जिट लोड और कैपिटल गेन टैक्स का भुगतान करना पड़ सकता है। इससे निवेश की लागत बढ़ जाती है और नेट रिटर्न प्रभावित होता है।
कितने म्यूचुअल फंड रखना सही माना जाता है?
फाइनेंशियल प्लानर्स का मानना है कि एक सामान्य निवेशक के लिए 3 से 5 म्यूचुअल फंड पर्याप्त होते हैं। उदाहरण के तौर पर—
- एक Large Cap Index या Flexi Cap Fund
- एक Mid Cap Fund
- एक Small Cap Fund (जोखिम क्षमता के अनुसार)
- एक Hybrid या Debt Fund
- जरूरत होने पर एक International Fund
इस तरह का संतुलित पोर्टफोलियो बेहतर विविधीकरण भी देता है और उसे मैनेज करना भी आसान रहता है।
निवेश से पहले रखें इन बातों का ध्यान
- केवल बेहतर रिटर्न देखकर नया फंड न खरीदें।
- पहले देखें कि नए फंड की होल्डिंग्स आपके मौजूदा पोर्टफोलियो से कितनी अलग हैं।
- हर साल अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें।
- जरूरत से ज्यादा फंड जोड़ने के बजाय अच्छे फंड में SIP बढ़ाना अधिक फायदेमंद हो सकता है।
- अपने निवेश लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार ही पोर्टफोलियो तैयार करें।
डिस्क्लेमर: ( यह खबर केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है। DD 24 Now किसी भी म्यूचुअल फंड, शेयर, IPO या अन्य निवेश साधन में निवेश की सलाह नहीं देता। किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले सेबी (SEBI) पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।)
Author: Dd 24 Now
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