सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को बुलडोजर कार्रवाई से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने बड़ी टिप्पणी की। अदालत ने संपत्ति ध्वस्तीकरण के खिलाफ तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि संबंधित पक्ष को पहले हाईकोर्ट जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि भवन स्वीकृत नक्शे के अनुसार बना है, जबकि प्रशासन का आरोप है कि निर्माण तालाब की भूमि पर किया गया है। कोर्ट ने हाईकोर्ट को दरकिनार कर सीधे सुप्रीम कोर्ट आने की प्रवृत्ति पर नाराजगी भी जताई। इस फैसले ने बुलडोजर कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (20 जुलाई) को एक संपत्ति को गिराए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया. इस दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने बड़ी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि भले ही इस संपत्ति को आज पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया जाए, तब भी वो आदेश नहीं देंगे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को पहले संबंधित हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए.
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से उसी दिन मामले की सुनवाई करने का अनुरोध किया था. वकील का कहना था कि संबंधित अधिकारी संपत्ति को गिराने की कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि निर्माण के लिए स्वीकृत भवन योजना मौजूद है, बावजूद इसके अधिकारी कार्रवाई कर रहे हैं.
क्या है मामला
वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि संपत्ति तालाब वाले इलाके में बनी बताई जा रही है, लेकिन इसके लिए मंज़ूरी वाला प्लान मौजूद था. उन्होंने कहा कि अधिकारियों का आरोप है कि संपत्ति का निर्माण तालाब की जमीन पर किया गया है, लेकिन ऐसा नहीं है. उन्होंने कहा कि भवन का निर्माण विधिवत स्वीकृत योजना के अनुसार किया गया है
हालांकि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मामले में तत्काल सुनवाई करने और किसी भी तरह की अंतरिम सुरक्षा देने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि ‘भले ही इसे आज पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया जाए, लेकिन मैं ऐसा नहीं करूंगा’. उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर पहली बार में विचार नहीं करेगा. —- CJI सूर्यकांत
सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से हाईकोर्ट जाने को कहा और पार्टियों द्वारा हाईकोर्ट को दरकिनार कर तत्काल राहत पाने के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की आदत पर नाराजगी जाहिर की. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस मामले में हाईकोर्ट जाने की सलाह दी. कोर्ट ने कहा कि मामले में राहत पाने के लिए पहले संबंधित हाईकोर्ट का रुख किया जाना चाहिए. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में तत्काल सुनवाई करने से साफ मना कर दिया.
Author: sarvendra chauhan
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