US-Iran Peace Deal: शांति वार्ता स्थगित, इजरायल अलग राह पर, ट्रंप को अपने ही नेताओं ने घेरा
वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित शांति वार्ता फिलहाल टल गई है। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने क्षेत्र में स्थायी शांति की उम्मीदों पर सवाल खड़े कर दिए हैं और वैश्विक कूटनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की प्रस्तावित स्विट्जरलैंड यात्रा भी रद्द कर दी गई है। व्हाइट हाउस ने कहा कि बातचीत की तैयारियां जारी थीं, लेकिन अंतिम चरण में कुछ व्यवस्थागत कारणों के चलते वार्ता को स्थगित करना पड़ा।
स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में प्रस्तावित बैठक अब नहीं होगी। हालांकि इसके पीछे की वजह सार्वजनिक नहीं की गई है।
ईरान पहले चाहता है अमेरिकी वादों का पालन
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, तेहरान पहले यह देखना चाहता है कि अंतरिम समझौते के तहत अमेरिका अपने वादों को लागू करने के लिए क्या कदम उठाता है। इसी कारण ईरानी प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई थी।
इससे पहले हुए 14 सूत्रीय समझौते के बाद संघर्षविराम को 60 दिनों तक बढ़ाने पर सहमति बनी थी। समझौते के तहत दोनों देशों को परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवादित मुद्दों पर सहमति बनाने के लिए समय दिया गया है।
ट्रंप पर अपने ही सहयोगियों का हमला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस समझौते को लेकर अपने ही रिपब्लिकन सहयोगियों की आलोचना झेलनी पड़ रही है। कई सांसदों का आरोप है कि युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका ने ईरान को जरूरत से ज्यादा रियायतें दे दी हैं।
समझौते के तहत ईरान को आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, अरबों डॉलर की जमी हुई संपत्तियों तक पहुंच और तेल निर्यात के लिए विशेष छूट दी गई है। जबकि युद्ध के दौरान ट्रंप ने ईरान के “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की बात कही थी।
खामेनेई का सख्त संदेश
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने कहा कि अमेरिका ने यह समझौता मजबूरी में किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वाशिंगटन अत्यधिक शर्तें थोपने की कोशिश करेगा तो ईरान उन्हें स्वीकार नहीं करेगा।
खामेनेई ने स्पष्ट संकेत दिए कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर आगे की वार्ताएं आसान नहीं होंगी।
क्या समझौते के बाद और मजबूत हुआ ईरान?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस समझौते के बाद ईरान पहले से अधिक मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। ईरान ने न केवल अपने रणनीतिक प्रभाव को बरकरार रखा बल्कि होरमुज जलडमरूमध्य पर भी अपनी पकड़ बनाए रखी है।
समझौते के तहत ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी स्वीकार की है और संवर्धित यूरेनियम भंडार को निष्क्रिय करने पर सहमति जताई है। हालांकि उसने यूरेनियम को देश से बाहर भेजने की अमेरिकी मांग को ठुकरा दिया है।
इजरायल की अलग रणनीति से बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के बावजूद इजरायल ने खुद को इस प्रक्रिया से अलग रखा है। इजरायल ने लेबनान में ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के खिलाफ अपने सैन्य अभियान जारी रखने के संकेत दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल की यह नीति भविष्य में समझौते की स्थिरता के लिए चुनौती बन सकती है।
तेल बाजार को राहत
होरमुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने के संकेतों के बाद वैश्विक बाजारों में राहत देखने को मिली है। शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और एलएनजी आपूर्ति इसी रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरती है। ऐसे में क्षेत्र में शांति की दिशा में हर कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 60 दिन अमेरिका और ईरान संबंधों के लिए बेहद अहम साबित होंगे। यदि दोनों देश परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर सहमति बना लेते हैं, तो पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा। लेकिन वार्ता टलने और इजरायल की अलग रणनीति ने अभी भी कई सवाल अनुत्तरित छोड़ दिए हैं।
Author: sarvendra chauhan
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