नई दिल्ली। E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने अपनी एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति का बचाव किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय का कहना है कि E20 पेट्रोल को हटाना आसान नहीं है, क्योंकि इससे किसानों, उद्योगों और देश की ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है।
सरकार ने क्यों दिया बड़ा बयान?
सरकार के अनुसार, पिछले कई वर्षों में एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए करीब 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। इस निवेश में सरकारी बैंक, निजी कंपनियां, सहकारी संस्थाएं और किसान जुड़े हुए हैं। यदि E20 नीति वापस ली जाती है तो यह पूरा निवेश प्रभावित हो सकता है।
क्या E20 से माइलेज कम होता है?
सरकार ने माना कि कुछ वाहनों में E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर 3 से 5 प्रतिशत तक माइलेज कम हो सकता है।
हालांकि मंत्रालय का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जिससे साबित हो कि E20 पेट्रोल इंजन, फ्यूल टैंक या रबर पाइप को नुकसान पहुंचाता है।
शुद्ध पेट्रोल और E20 का विकल्प क्यों नहीं?
कई विशेषज्ञ चाहते हैं कि ग्राहकों को सामान्य पेट्रोल, E10 और E20 में से चुनने की सुविधा मिले।
लेकिन सरकार का कहना है कि ऐसा करने के लिए पूरे देश में अलग स्टोरेज, सप्लाई और वितरण व्यवस्था बनानी पड़ेगी, जिससे लागत काफी बढ़ जाएगी।
E20 पेट्रोल महंगा क्यों पड़ता है?
सरकार के अनुसार एथेनॉल का उत्पादन सस्ता नहीं है।
- कम क्रूड ऑयल कीमत पर E20 महंगा पड़ सकता है।
- लेकिन जब कच्चे तेल की कीमत बहुत बढ़ती है, तब E20 बेहतर विकल्प बन जाता है।
किसानों को क्या फायदा?
सरकार किसानों से गन्ना, मक्का और अन्य फसलों से बनने वाले एथेनॉल की खरीद तय कीमतों पर करती है।
इससे किसानों की आय बढ़ती है, पेट्रोल आयात कम होता है और पर्यावरण को भी फायदा मिलता है।
सरकार का उद्देश्य
- पेट्रोल आयात कम करना
- किसानों की आय बढ़ाना
- स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध सरकारी जानकारी और सार्वजनिक रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। ईंधन से जुड़े निर्णय लेने से पहले वाहन निर्माता कंपनी की सलाह अवश्य देखें।
Author: sarvendra chauhan
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