गणतंत्र दिवस पर एक पत्रकार की सोच — आखिर कैसा हो 2026 का आधुनिक भारत?

 

लेखक— शीबू खान
राष्ट्रीय महासचिव, साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन

गणतंत्र दिवस केवल तिरंगा फहराने या परेड देखने का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन का अवसर भी है कि हमारा भारत किस दिशा में बढ़ रहा है और हम 2026 के आधुनिक भारत को कैसा देखना चाहते हैं। एक पत्रकार होने के नाते, मेरी यह सोच सिर्फ कल्पना नहीं, बल्कि आम नागरिकों की अपेक्षाओं, ज़मीनी सच्चाइयों और संविधान की मूल भावना से जुड़ी है।
आधुनिक भारत की नींव किसान की खुशहाली से मजबूत होगी। जब तक अन्नदाता सुरक्षित, सम्मानित और आर्थिक रूप से सशक्त नहीं होगा, तब तक विकास अधूरा रहेगा। किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य, समय पर भुगतान, सिंचाई व भंडारण की बेहतर सुविधाएं और महंगाई पर नियंत्रण—ये सब 2026 के भारत की प्राथमिकता होनी चाहिए।
देश का भविष्य नौजवानों के हाथों में है। शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना समय की मांग है। नौजवानों को सिर्फ डिग्रियां नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने के साधन मिलें, ताकि वे राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदार बन सकें।
महिलाओं को बराबरी का अधिकार केवल कागज़ों तक सीमित न रहे, बल्कि व्यवहार में दिखे। सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में समान अवसर—यही सशक्त भारत की पहचान होगी। वहीं नौनिहालों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नैतिक संस्कार और सुरक्षित वातावरण मिलना ही सच्चे राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। जिन बुजुर्गों ने इस देश को सींचा है, उनके लिए सुलभ और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है। लोकतंत्र की मजबूती स्वतंत्र पत्रकारिता से ही संभव है। पत्रकारों को भयमुक्त वातावरण, सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए। कलमकारों को आय और रोजगार की स्थिरता मिले, ताकि वे बिना दबाव सच्चाई को सामने ला सकें। एक मजबूत मीडिया ही एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है। 2026 का आधुनिक भारत वही होगा, जहां शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं निःशुल्क या सस्ती हों। महंगाई पर नियंत्रण और आम आदमी की क्रयशक्ति बढ़ाना सरकार और समाज—दोनों की साझा जिम्मेदारी है। सबसे अहम है देश में अमन, चैन और शांति का माहौल। जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर एकता और भाईचारे को मजबूत करना ही गणतंत्र की सच्ची भावना है।
गणतंत्र दिवस पर मेरी यही कामना है कि 2026 का भारत केवल आर्थिक रूप से नहीं, बल्कि सामाजिक, नैतिक और लोकतांत्रिक रूप से भी सशक्त हो—जहां हर नागरिक को समान अवसर, सम्मान और सुरक्षित भविष्य मिले। यही एक पत्रकार की सोच है, यही आधुनिक भारत का सपना।

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