आरबीआई ने आम आदमी के हित में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित पेश किया है। इसमें कहा गया है कि कम अमाउंट के डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को मुआवजा मिलेगा। इसमें व्यक्ति को नुकसान के 85 फीसदी तक मुआवजा मिल सकता है। इसके लिए 25,000 रुपये की लिमिट तय की गई है। यह मुआवजा एक व्यक्ति को सिर्फ एक बार ही मिलेगा। इसका मतलब है कि अगर व्यक्ति एक से ज्यादा बार फ्रॉड का शिकार होता है तो उसे बार-बार मुआवजा नहीं मिलेगा।
आरबीआई ने 6 मार्च को पेश किया ड्राफ्ट प्रपोजल—
RBI का यह प्रस्ताव उस ड्राफ्ट अमेंडमेंट्स का हिस्सा है, जिसे केंद्रीय बैंक ने 6 मार्च को जारी किया। आरबीआई डिजिटल ट्रांजेक्शंस में कस्टमर की लायबिलिटी से जुड़े फ्रेमवर्क को रिव्यू कर रहा है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस बारे में 6 फरवरी को मॉनेटरी पॉलिसी पेश करने के दौरान ऐलान किया था। केंद्रीय बैंक का नया प्रस्ताव 1 जुलाई, 2026 को या इसके बाद हुए इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजेक्शंस पर लागू होगा। आरबीआई ने इस ड्राफ्ट पर लोगों की राय मांगी है। 6 अप्रैल, 2026 तक इस पर राय दी जा सकती है।
मैक्सिमम 25,000 रुपये तक मिलेगा मुआवजा
प्रस्तावित फ्रेमवर्क में कहा गया है कि मुआवजा ऐसे इंडिविजुअल कस्टमर्स को मिलेगा, जिन्हें खास मामलों में इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजेक्शंस में फ्रॉड की वजह से 50,000 रुपये तक का नुकसान होता है। फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को लॉस का 85 फीसदी या 25,000 रुपये में से जो भी कम होगा वह बतौर मुआवजा मिलेगा। इसके लिए फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को फ्रॉड के बारे में तुरंत बैंक और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल या नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन को जानकारी देनी होगी। ऐसा फ्रॉड के 5 दिन के अंदर करना होगा।
आरबीआई और बैंक को उठाना होगा मुआवजे का बोझ
अगर लॉस का अमाउंट 29,412 रुपये से कम है, जिसमें मुआवजा का कैलकुलेशन 85 फीसीद के रेट से होना है तो आरबीआई खुद 65 फीसदी मुआवजे की भरपाई करेगा। बाकी 10-10 फीसदी का बोझ कस्टमर के बैंक बेनेफिशियरी बैंक को उठाना होगा। अगर कुल लॉस 29,412 से 50,000 रुपये के बीच है तो मुआवजे की लिमिट 25,000 रुपये होगी। ऐसे मामलों में आरबीआई 19,118 रुपये कंट्रिब्यूट करेगा। कस्टमर के बैंक और बेनेफिशियरी बैंक को 2,941-2941 रुपये कंट्रिब्यूट करना होगा।
फ्रॉड के 5 दिन के अंदर शिकायत दर्ज करानी होगी
बैंक को अप्लिकेशन मिलने के 5 कैलेंडर डेज (दिन) के अंदर कंपनसेशन यानी मुआवजा का पेमेंट करना होगा। बाद में बैंक तिमाही आधार पर आरबीआई से रीइंबर्समेंट के लिए क्लेम कर सकेगा। आरबीआई ने फ्रॉड से मुआवजे के फ्रेमवर्क के अलावा कस्टमर प्रोटेक्शन रूल्स में बदलाव का भी प्रस्ताव पेश किया है। ये सभी प्रस्ताव डिजिटल बैंकिंग से जुड़े हैं। माना जा रहा है कि इससे डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड के शिकार को बड़ी राहत मिलेगी।
Author: sarvendra chauhan
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