15 जुलाई से शुरू होगी गुप्त नवरात्रि, जानिए 10 महाविद्याओं की साधना का रहस्य और महत्व
सनातन धर्म में साल में चार बार नवरात्रि मनाई जाती है, जिनमें दो गुप्त नवरात्रि विशेष महत्व रखती हैं। वर्ष 2026 में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से 23 जुलाई तक रहेगी। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की जगह दस महाविद्याओं की विशेष पूजा और साधना की जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार गुप्त नवरात्रि तांत्रिक साधना, आध्यात्मिक उन्नति, शत्रु बाधा से मुक्ति, धन-संपत्ति और मनोकामना पूर्ति का विशेष पर्व माना जाता है।
गुप्त नवरात्रि में इन 10 महाविद्याओं की होती है पूजा
- मां काली
- मां तारा
- मां त्रिपुरा सुंदरी
- मां भुवनेश्वरी
- मां छिन्नमस्ता
- मां त्रिपुरा भैरवी
- मां धूमावती
- मां बगलामुखी
- मां मातंगी
- मां कमला
हर महाविद्या का अपना अलग महत्व माना गया है। मां बगलामुखी शत्रु विजय, मां कमला धन-समृद्धि, मां मातंगी वाणी सिद्धि और मां काली भय एवं नकारात्मक शक्तियों से रक्षा का आशीर्वाद देती हैं।
मा काली: 10 महाविद्याओं में सबसे पहले आती हैं मां काली. इनका जन्म रक्तबीज का संहार करने के लिए हुआ था. गुप्त नवरात्रि में तांत्रिक मां काली की साधना कर दिव्य शक्तियां प्राप्त करते हैं.
मां तारा: मां तारा जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति दिलाती हैं. अघोरी मां तारा की साधना करते हैं. इनकी साधना से शांति और समृद्धि भी प्राप्त होती है.
मां त्रिपुरा संदुरी: शास्त्रों में मां त्रिपुरा संदुरी को तीनों लोकों में सबसे सुंदर माना गया है. मां त्रिपुरा सुंदरी की पूजा करने से मोक्ष मिलता है. तांत्रिक किसी को सम्मोहित करने के लिए भी इनकी पूजा करते हैं.
मां भुनेश्वरी: मां भुनेश्वरी पूरे संसार का पालन पोषण करती हैं. मां आकाश, वायु, पृथ्वी, अग्नि और जल का निर्माण करती हैं. मां के आशीर्वाद से धन लाभ होता है.
मां छिन्नमस्ता: मां छिन्नमस्ता का संबंध शास्त्रों में महाप्रलय से माना जाता है. गुप्त नवरात्री में मां छिन्नमस्ता की साधना करने से मां सरस्वती की सिद्धि प्राप्त होती है.
मां त्रिपुरा भैरवी: इनको बंदीछोड़ माता कहा गया है. मान्यता है कि इनकी साधना कचहरी के मुकदमों, कारावास और कई बंधनों से मुक्ति दिलाती है. ये माता महाकाली की छाया से उत्पन्न हुई हैं.
मां धूमावती: मां धूमावती माता सती के शरीर से निकले धुएं से उत्पन्न हुईंं हैं. गुप्त नवरात्रि में मां धूमावती की साधना से रोग, शोक और दुख के नियंत्रण की विद्या प्राप्त होती है.
मां बगलामुखी: गुप्त नवरात्रि में मां बगलामुखी की साधना करने से शत्रु और विरोधियों पर विजय प्राप्त होती है. महाभारत काल में श्रीकृष्ण और अर्जुन ने भी कौरवों पर विजय हासिल करने के लिए बगलामुखी मां की पूजा की थी.
मां मातंगी: मां मातंगी वाणी और संगीत की अधिष्ठात्री देवी हैं. इनकी अराधना करने से गृहस्थ जीवन के सभी सुख प्राप्त होते हैं. यही वो देवी भी हैं, जिनको जूठन का भोग लगाया जाता है.
मां कमला: मां कमला भाग्य, सम्मान, पवित्रता और परोपकार की देवी हैं. मां कमला तांत्रिक लक्ष्मी भी कही जाती हैं. इनकी पूजा मां लक्ष्मी के पूजन के समान की फल देती है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि में श्रद्धा, नियम और सात्विक जीवन के साथ पूजा-अर्चना करने से विशेष पुण्य और देवी कृपा प्राप्त होती है।
Author: sarvendra chauhan
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