ITR Filing 2026: फर्जी डिडक्शन दिखाकर टैक्स बचाना पड़ सकता है भारी, 200% जुर्माना और जेल तक हो सकती है
नई दिल्ली: अगर आप ITR Filing 2026 के दौरान टैक्स बचाने के लिए फर्जी डिडक्शन, नकली रसीदें या गलत जानकारी देने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। आयकर विभाग अब पहले से कहीं ज्यादा हाई-टेक हो चुका है और AIS, Form 26AS, बैंक, नियोक्ता (Employer) और अन्य वित्तीय संस्थानों से मिले डेटा का मिलान करके हर दावे की जांच करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई टैक्सपेयर जानबूझकर गलत डिडक्शन क्लेम करता है या आय छिपाता है, तो उसे केवल टैक्स ही नहीं बल्कि भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।
किन मामलों में होती है कार्रवाई?
यदि जांच के दौरान आयकर विभाग को पता चलता है कि टैक्स बचाने के लिए फर्जी खर्च, नकली निवेश, गलत मेडिकल या एजुकेशन बिल, या आय छिपाने जैसी जानकारी दी गई है, तो आयकर अधिनियम की धारा 271AAD के तहत गलत एंट्री की राशि के बराबर 100% तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
Under Reporting और Misreporting में अंतर
- Under Reporting: गलती या चूक के कारण कम आय दिखाना। इसमें देय टैक्स का 50% तक जुर्माना लग सकता है।
- Misreporting: जानबूझकर आय छिपाना या फर्जी जानकारी देना। ऐसे मामलों में देय टैक्स का 200% तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
जेल भी हो सकती है
अगर जांच में यह साबित हो जाता है कि टैक्स चोरी जानबूझकर की गई है, तो आयकर अधिनियम की धारा 276C और 277 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। दोषी पाए जाने पर 3 महीने से 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
टैक्सपेयर्स के लिए सलाह
ITR भरते समय केवल वही डिडक्शन क्लेम करें जिनके पास वैध दस्तावेज मौजूद हों। सभी जानकारी सही और सत्यापित रखें ताकि भविष्य में किसी कानूनी परेशानी का सामना न करना पड़े।
Author: sarvendra chauhan
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