चार साल बाद मिला मासूम यश को न्याय : झोलाछाप डॉक्टर मोहन को 7 साल की सजा

मेरठ। इलाज में लापरवाही के कारण 4 वर्षीय मासूम की मौत के मामले में 4 साल बाद न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषी झोलाछाप डॉक्टर को 7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने उस पर ₹30,000 का आर्थिक दंड भी लगाया है। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने कहा कि “देर से मिला, पर न्याय मिला… सच की जीत हुई।”

क्या है पूरा मामला?–

घटना वर्ष 2021 की है। थाना मुंडाली क्षेत्र के गांव भगवानपुर निवासी दीपक तोमर का मासूम 4 वर्षीय पुत्र यश तोमर बुखार से पीड़ित था। परिजन उसे गढ़ रोड स्थित जय भीम नगर निवासी झोलाछाप डॉक्टर मोहन कुमार (पुत्र जयपाल सिंह) के पास लेकर पहुंचे। मोहन कुमार पिछले कई वर्षों से गांव भगवानपुर में क्लीनिक चलाकर लोगों का बिना योग्यता इलाज करता था।

आरोप है कि डॉक्टर ने बच्चे को गलत इंजेक्शन लगाने के साथ गलत दवाइयों का प्रयोग किया, जिसकी वजह से बच्चे की तबीयत और बिगड़ी। बच्चे को पहले पैरालिसिस हुआ, फिर उसकी आंखों की रोशनी चली गई और नसें ब्लॉक हो गईं। इलाज के अभाव और गलत उपचार के चलते बच्चे की दर्दनाक मृत्यु हो गई।

इस मामले में पुलिस और अभियोजन पक्ष ने सघन पैरवी कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:—

थाना प्रभारी, मुंडाली रामगोपाल सिंह

शासकीय अधिवक्ता परजाना मकसूद

पैरवीकर्ता (पुलिस) कांस्टेबल जय शर्मा

पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता कुंवर हामिद अली

पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता कुंवर हामिद अली

सभी साक्ष्य और गवाहियों के आधार पर अपर जिला जज राममंगल  सिंह यादव ने आरोपी झोलाछाप डॉक्टर मोहन कुमार को 7 साल की कठोर सजा और ₹30,000 का आर्थिक दंड सुनाया।

 

 

 

पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया—

फैसले के बाद पीड़ित परिवार की आंखों में आंसू थे लेकिन चेहरे पर न्याय की चमक। परिवार ने कहा:

“हमारे बच्चे की जान तो नहीं लौट सकती, पर आज न्याय मिला है। उम्मीद है सरकार ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई करेगी ताकि किसी और परिवार को ये दर्द न सहना पड़े।”

 

झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग तेज—

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खुलेआम झोलाछाप डॉक्टर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

स्थानीय लोग प्रशासन और सरकार से मांग कर रहे हैं कि:—

झोलाछाप डॉक्टरों पर तत्काल कार्रवाई हो

बिना डिग्री/रजिस्ट्रेशन इलाज करने वालों के क्लीनिक सील हों

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जाए।

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