Instagram पर बच्चों से जुड़े कथित आपत्तिजनक विज्ञापनों पर Meta को केंद्र सरकार का नोटिस, 7 दिन में मांगा जवाब
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram की मूल कंपनी Meta को बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कथित आपत्तिजनक विज्ञापनों और कंटेंट के मामले में नोटिस जारी किया है। सरकार ने कंपनी को ऐसे सभी कथित विज्ञापनों और सामग्री को तत्काल हटाने का निर्देश देते हुए सात दिनों के भीतर विस्तृत जवाब देने को कहा है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और यदि आवश्यक हुआ तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई भी की जा सकती है।
MeitY ने मांगा विस्तृत जवाब
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा जारी नोटिस में Meta से पूछा गया है कि Instagram पर ऐसे कथित विज्ञापन और कंटेंट कैसे दिखाई दिए और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए कंपनी क्या अतिरिक्त कदम उठाएगी।
सरकार ने यह भी कहा कि निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और POCSO Act, 2012 के तहत कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।
रिपोर्ट में क्या लगाए गए आरोप?
हाल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि Meta का रिकमेंडेशन एल्गोरिद्म कथित रूप से ऐसे वीडियो और विज्ञापनों को बढ़ावा दे रहा था जिनका संबंध बच्चों के यौन शोषण से जुड़े अवैध कंटेंट से था।
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ पेड विज्ञापनों में ऐसे शब्दों का उपयोग किया गया, जिनके माध्यम से उपयोगकर्ताओं को कथित रूप से ऐसे प्लेटफॉर्म की ओर निर्देशित किया जा रहा था जहां अवैध सामग्री उपलब्ध थी।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर के प्रकाशन तक नहीं हुई है।
सरकार ने Meta से पूछे ये अहम सवाल
सरकार ने Meta से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है—
- यदि कंपनी की विज्ञापन नीति अश्लील और यौन रूप से स्पष्ट सामग्री पर रोक लगाती है, तो ऐसे कथित विज्ञापन कैसे स्वीकृत हुए?
- आरोप सामने आने के बाद कंपनी ने क्या कार्रवाई की?
- भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कौन-सी नई सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी?
- यदि इन विज्ञापनों से कंपनी को राजस्व प्राप्त हुआ है, तो उसकी जवाबदेही कैसे तय होगी?
Meta ने क्या कहा?
Meta ने अपने बयान में कहा है कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़े किसी भी प्रकार के कंटेंट या विज्ञापन के प्रति उसकी Zero Tolerance Policy है।
कंपनी के अनुसार—
- AI आधारित तकनीक और विशेषज्ञ टीमों की मदद से ऐसे कंटेंट की पहचान कर हटाया जाता है।
- अपराधी लगातार नए तरीके अपनाते हैं, इसलिए सुरक्षा प्रणालियों को लगातार अपडेट किया जा रहा है।
- अन्य टेक कंपनियों और संबंधित एजेंसियों के साथ भी जानकारी साझा की जाती है ताकि ऐसे नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर सरकार का सख्त रुख
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को अपने कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम और विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया को और मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि किसी भी प्रकार के अवैध या हानिकारक कंटेंट को समय रहते रोका जा सके।
डिस्क्लेमर
यह समाचार उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। मामले की जांच जारी है। अंतिम तथ्य और कानूनी निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसियों एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।
Author: sarvendra chauhan
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