नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट के बढ़ते दौर के बावजूद आज भी देश में बड़ी संख्या में लोग नकद (Cash) में लेनदेन करते हैं। लेकिन अगर तय सीमा से अधिक कैश ट्रांजैक्शन किया जाता है, तो आयकर विभाग की नजर आप पर पड़ सकती है और कुछ मामलों में भारी जुर्माना भी लग सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कैश लेनदेन से जुड़े नियमों का उद्देश्य टैक्स चोरी रोकना और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाना है।
1. एक दिन में ₹2 लाख से अधिक नकद स्वीकार करना
यदि कोई व्यक्ति एक ही व्यक्ति से एक दिन में, एक ही लेनदेन या एक ही अवसर के लिए ₹2 लाख या उससे अधिक नकद स्वीकार करता है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
2. ₹20,000 या उससे अधिक का कैश लोन
₹20,000 या उससे अधिक का लोन, डिपॉजिट या प्रॉपर्टी एडवांस नकद में लेना या देना नियमों के विरुद्ध हो सकता है। ऐसे भुगतान बैंकिंग माध्यम से करना अधिक सुरक्षित माना जाता है।
3. कैश में लोन की वापसी
यदि आपने लोन लिया है, तो ₹20,000 या उससे अधिक की राशि नकद में लौटाने के बजाय बैंक ट्रांसफर, चेक या अन्य अधिकृत माध्यम से भुगतान करना चाहिए।
4. कारोबार में ₹10,000 से अधिक का नकद खर्च
व्यापारियों के लिए एक व्यक्ति को एक दिन में ₹10,000 से अधिक नकद भुगतान करने पर उस खर्च पर टैक्स लाभ सीमित हो सकता है। ट्रांसपोर्ट व्यवसाय के लिए यह सीमा अलग हो सकती है।
5. ₹2,000 से अधिक की नकद डोनेशन
यदि आप आयकर में छूट का लाभ लेना चाहते हैं, तो ₹2,000 से अधिक का दान डिजिटल माध्यम या बैंकिंग चैनल से करना बेहतर है।
6. बैंक से बड़ी कैश निकासी
अपने बैंक खाते से पैसा निकालने पर सामान्य रूप से कोई निश्चित सीमा नहीं है, लेकिन बार-बार बड़ी नकद निकासी नियामकीय निगरानी में आ सकती है। कुछ परिस्थितियों में लागू प्रावधानों के अनुसार TDS भी लागू हो सकता है।
7. प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री में कैश भुगतान
प्रॉपर्टी लेनदेन में बड़ी नकद राशि या ₹20,000 से अधिक का नकद एडवांस विवाद और जांच का कारण बन सकता है। ऐसे मामलों में बैंकिंग माध्यम अपनाना बेहतर माना जाता है।
कैश ट्रांजैक्शन करते समय रखें ये सावधानियां
- बड़ी रकम के लिए बैंक ट्रांसफर या UPI का उपयोग करें।
- सभी भुगतान का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
- नियमों के अनुरूप ही नकद लेनदेन करें।
- आवश्यकता होने पर टैक्स विशेषज्ञ से सलाह लें।
डिस्क्लेमर
यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। टैक्स से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले आयकर विभाग के आधिकारिक दिशा-निर्देश या योग्य टैक्स सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।
Author: sarvendra chauhan
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