बार-बार खून की कमी होना हो सकता है थैलेसीमिया का संकेत, समय रहते करें पहचान | जानिए लक्षण, कारण और बचाव

बार-बार खून की कमी होना हो सकता है थैलेसीमिया का संकेत, समय रहते करें पहचान

नई दिल्ली।

अगर आपके शरीर में बार-बार खून की कमी (एनीमिया) हो रही है और दवाइयों या आयरन सप्लीमेंट लेने के बाद भी हीमोग्लोबिन सामान्य नहीं हो रहा, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार कई मामलों में यह समस्या थैलेसीमिया (Thalassemia) जैसी गंभीर आनुवंशिक (Genetic) बीमारी का संकेत हो सकती है।

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां थैलेसीमिया के मरीजों की संख्या काफी अधिक है। हर वर्ष हजारों बच्चे इस बीमारी के साथ जन्म लेते हैं। यदि समय रहते जांच कर ली जाए तो बीमारी को नियंत्रित करने और भविष्य की पीढ़ियों को इससे बचाने में काफी मदद मिल सकती है।


क्या है थैलेसीमिया?थैलेसीमिया क्या है? लक्षण, कारण और रोकथाम की व्याख्या

थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त रोग (Genetic Blood Disorder) है। यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में पहुंचती है।

इस बीमारी में शरीर पर्याप्त मात्रा में सामान्य हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता।

हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) में मौजूद वह प्रोटीन है जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है।

जब हीमोग्लोबिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता तो शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया होने लगता है।


भारत में क्यों बढ़ रही है चिंता?

विशेषज्ञों के अनुसार—

  • भारत में लाखों लोग थैलेसीमिया ट्रेट के साथ जीवन जी रहे हैं।
  • अधिकांश लोगों को पता ही नहीं होता कि वे इस बीमारी के वाहक (Carrier) हैं।
  • यदि दो Carrier आपस में विवाह करते हैं तो बच्चे में गंभीर थैलेसीमिया होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।

इसी कारण विवाह से पहले और गर्भधारण से पहले थैलेसीमिया जांच कराने की सलाह दी जाती है।


बार-बार खून की कमी क्यों होती है?खून की कमी: जानें इसके कारण, लक्षण और प्रभावी इलाज

खून की कमी के कई कारण हो सकते हैं—

✔ आयरन की कमी

✔ विटामिन B12 की कमी

✔ फोलिक एसिड की कमी

✔ लगातार रक्तस्राव

✔ किडनी रोग

✔ लिवर रोग

✔ कैंसर

✔ थैलेसीमिया

यदि बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ रही हो तो डॉक्टर थैलेसीमिया की जांच कराने की सलाह देते हैं।


थैलेसीमिया के प्रमुख लक्षणथैलासीमिया / Thalassemia | थैलासीमिया / Thalassemia का कारण,… | Flickr

इस बीमारी के लक्षण इसकी गंभीरता पर निर्भर करते हैं।

इनमें शामिल हैं—

  • बार-बार हीमोग्लोबिन कम होना
  • शरीर में कमजोरी
  • जल्दी थक जाना
  • चक्कर आना
  • सांस फूलना
  • चेहरा पीला पड़ना
  • बच्चों की लंबाई और वजन कम बढ़ना
  • भूख कम लगना
  • आंखों का पीला होना
  • त्वचा का पीला होना
  • बार-बार संक्रमण
  • हड्डियों में बदलाव
  • पेट का बढ़ जाना (तिल्ली बढ़ना)

किन लोगों को ज्यादा खतरा?

सबसे अधिक खतरा उन लोगों में होता है—

  • जिनके परिवार में पहले से थैलेसीमिया हो।
  • जिनके माता-पिता Carrier हों।
  • रिश्तेदारी में विवाह होने पर।
  • जिनका हीमोग्लोबिन हमेशा कम रहता हो।

एनीमिया और थैलेसीमिया में अंतर

एनीमिया थैलेसीमिया
कई कारण हो सकते हैं आनुवंशिक बीमारी
आयरन की कमी से भी होता है हीमोग्लोबिन बनाने में गड़बड़ी
दवा से ठीक हो सकता है पूरी तरह खत्म नहीं होता
किसी भी उम्र में जन्मजात बीमारी

थैलेसीमिया के प्रकार

1. थैलेसीमिया माइनर

  • Carrier
  • सामान्य जीवन
  • अधिक इलाज की जरूरत नहीं

2. थैलेसीमिया इंटरमीडिया

  • मध्यम गंभीर
  • समय-समय पर इलाज

3. थैलेसीमिया मेजर

  • सबसे गंभीर
  • बार-बार Blood Transfusion
  • जीवनभर इलाज

कैसे होती है जांच?

डॉक्टर निम्न जांच करा सकते हैं—

  • CBC
  • Hb Electrophoresis
  • HPLC Test
  • Genetic Test
  • Iron Profile

इलाज

इलाज मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है।

  • Blood Transfusion
  • Iron Chelation Therapy
  • Folic Acid
  • Bone Marrow Transplant
  • नियमित जांच

क्या थैलेसीमिया पूरी तरह ठीक हो सकता है?

कुछ मरीजों में Bone Marrow Transplant से इलाज संभव है।

हालांकि सभी मरीज इसके लिए उपयुक्त नहीं होते।

इसलिए समय पर जांच सबसे जरूरी मानी जाती है।


बचाव कैसे करें?

✔ शादी से पहले जांच

✔ Pregnancy Planning से पहले Screening

✔ परिवार में बीमारी होने पर Genetic Counseling

✔ समय-समय पर Blood Test

✔ डॉक्टर की सलाह लें


डॉक्टर से कब मिलें?

यदि—

  • बार-बार खून की कमी हो।
  • हीमोग्लोबिन लगातार कम रहता हो।
  • कमजोरी खत्म न हो।
  • सांस फूलती हो।
  • परिवार में थैलेसीमिया हो।

तो तुरंत चिकित्सक से सलाह लें।


निष्कर्ष

थैलेसीमिया एक गंभीर लेकिन समय पर पहचान होने वाली आनुवंशिक बीमारी है। यदि बार-बार खून की कमी हो रही है, आयरन की दवा लेने के बावजूद सुधार नहीं हो रहा या परिवार में इस बीमारी का इतिहास है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर आवश्यक जांच अवश्य कराएं। समय पर पहचान से इलाज बेहतर होता है और भविष्य में बच्चों को इस बीमारी से बचाने में भी मदद मिल सकती है।

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