PM KE PEN SE बातें धर्म ग्रंथो की- वेदपुराण ग्रंथों में लिखा जीवशास्त्र

PM KE PEN SE बातें धर्म ग्रंथो की- वेदपुराण ग्रंथों में लिखा जीवशास्त्र

वेद पुराण और अन्य धर्मों के धर्मग्रंथों से हमें काफी सारी जानकारी मिलती हैं। पद्म पुराण की एक कथा में हमें जीवशास्त्र की जानकारी मिली हैं जिसे हम आपके सामने रख रहे हैं।

पद्म पुराण की एक कथा में ययाति और मातली का एक संवाद आता हैं।

ययाती के पूछने पर मातली उन्हें बताते हैं:

कर्मों के मेल से जो शरीर उत्पन्न होता है, उसे रूप के परिमाण से चार प्रकार का समझना चाहिये।

उद्भिज्ज, स्वेदज, अण्डज और जरायुज ये ही चार प्रकार के शरीर हैं।

स्थावरों को उद्भिज्ज कहते हैं। उन्हें तृण, गुल्म और लता आदि के रूप में जानना चाहिये।

कृमि, कीट और पतङ्ग आदि प्राणी स्वेदज कहलाते हैं।

समस्त पक्षी, नाके और मछली आदि जीव अण्डज हैं।

मनुष्यों और चौपायों को जरायुज जानना चाहिये।

इस विषय की बहुत सारी जानकारी आगे और भी लिखी गयी हैं लेकिन पहले इतनी ही बात को समझ लेते हैं।

सरल भाषा में उद्भिज्ज मतलब, जमीन से उगने वाले जीव होते हैं, जैसे पेड़, पौधे, लताएँ, घास आदि।

जरायुज मतलब गर्भ से, जेर से जन्म लेने वाले जीव: जैसे मनुष्य, गाय, शेर आदि।

अंडज मतलब अंडे से जन्म लेने वाले जीव: जैसे पक्षी, साँप, मछली आदि।

स्वेदज मतलब पसीने या गंदगी/सीलन से पैदा होने वाले छोटे जीव: जैसे जुएँ, कीड़े-मकोड़े आदि।

पद्म पुराण की इस बात को आधुनिक विज्ञान से भी समझने की कोशिश करते हैं।

उद्भिज्ज (Udbhijj) का आधुनिक नाम पादप जगत (Plant Kingdom / Flora) हैं। इसका अर्थ हैं जो पृथ्वी को फोड़कर या भेदकर बाहर निकलते हैं।

इसकी वैज्ञानिक जानकारी इस प्रकार हैं: आधुनिक विज्ञान में इन्हें स्वपोषी (Autotrophs) जीव कहा जाता है। ये मुख्य रूप से पेड़, पौधे, झाड़ियाँ, लताएँ और घास हैं। ये प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) के जरिए सूर्य के प्रकाश से अपना भोजन खुद बनाते हैं। इनमें जड़, तना, पत्तियां और बीज पाए जाते हैं।

अंडज (Andaj) का आधुनिक नाम अंड प्रजक (Oviparous) हैं। इसका अर्थ हैं जो अंडे (Egg) से पैदा होते हैं।

इसकी वैज्ञानिक जानकारी इस प्रकार हैं: आधुनिक जीव विज्ञान के अनुसार, इस श्रेणी में वे जीव आते हैं जिनके बच्चे शरीर के बाहर अंडे के रूप में विकसित होते हैं और परिपक्व होने पर अंडे से बाहर आते हैं। जैसे पक्षी (Birds) याने कौआ, कबूतर, मुर्गी आदि। सरीसृप (Reptiles) मतलब सांप, छिपकली, मगरमच्छ। उभयचर (Amphibians) जैसे मेंढक मछलियां (Fish)। अधिकांश समुद्री और मीठे पानी की मछलियां इनमें आती हैं। कीट (Insects) मतलब तितली, चींटी, मक्खी आदि जीव।

जरायुज (Jarayuj) का आधुनिक नाम जरायुज / स्तनधारी (Viviparous / Mammals) हैं। इसका अर्थ हैं जो माता के गर्भ (Placenta/Womb) से सीधे शिशु के रूप में जन्म लेते हैं। ‘जरायु’ का अर्थ गर्भ की झिल्ली या जेर होता है।

इसकी वैज्ञानिक जानकारी इस प्रकार हैं: ये पूर्ण रूप से विकसित बच्चों को जन्म देते हैं। जन्म के बाद ये जीव अपनी मां के दूध पर निर्भर होते हैं। इनमें आंतरिक निषेचन (Internal Fertilization) होता है। उदाहरण के लिए मनुष्य (Humans) चौपाये पशु जैसे गाय, भैंस, शेर, कुत्ता, बिल्ली, हाथी आदि। समुद्री स्तनधारी जैसे व्हेल और डॉल्फिन।

स्वेदज (Svedaj) का आधुनिक नाम हैं सूक्ष्मजीव और परजीवी (Microorganisms, Parasites & Arthropods)

इसका अर्थ हैं जो पसीने, नमी, गंदगी या गर्मी (Sweat/Moisture) से पैदा होते हैं।

इसकी वैज्ञानिक जानकारी इस प्रकार हैं: प्राचीन काल में सूक्ष्मदर्शी (Microscope) न होने के कारण माना जाता था कि जूं, पिस्सू यह कीड़े पसीने या गंदगी से अचानक पैदा हो जाते हैं (Spontaneous Generation)। आधुनिक विज्ञान के अनुसार, ये जीव वास्तव में बहुत छोटे कीड़े (Insects), बैक्टीरिया (Bacteria), कवक (Fungi/Fungus) या परजीवी (Parasites) हैं, जो अत्यधिक नमी, गर्मी और जैविक कचरे (Organic Waste) में बहुत तेजी से अंडे देते हैं और वंश बढ़ाते हैं। इसके उदाहरण हैं जूं (Lice), खटमल, फंगस (उल्ली), बैक्टीरिया, और विभिन्न प्रकार के सूक्ष्म कृमि (Worms)।

इस विषय की बहुत सारी जानकारी और भी हैं पर उसे अन्य भाग में समझने का प्रयास करेंगे।

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