महाप्रलय The Great Cataclysm PM KE PEN SE
इस भाग में हम महाप्रलय से संबंधित धर्म ग्रंथों में लिखी बातें और भू-जीव विज्ञान में हुई कुछ घटनाओं को समझने की कोशिश करेंगे।
महाप्रलय और जहाज से बचकर नई सृष्टि की शुरुआत होने की कहानी दुनिया के प्रमुख चार-पाँच धर्मों और प्राचीन सभ्यताओं के ग्रंथों में अलग-अलग नामों से मिलती है।
हिन्दू धर्म में शतपथ ब्राह्मण और मत्स्य पुराण ग्रंथ में कथा आती हैं कि भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। राजा सत्यव्रत/वैवस्वत मनु ने एक विशाल नाव बनाई। उस नाव में सभी जीव-जंतुओं के जोड़े और वेदों को सुरक्षित रखा गया। मछली रूपी भगवान विष्णु ने उस नाव की रक्षा की।
कहानी कुछ इस प्रकार हैं; एक बार राजा सत्यव्रत जो आगे चलकर वैवस्वत मनु बने। नदी में जल तर्पण कर रहे थे। तभी उनकी अंजलि में जल के साथ एक बहुत छोटी मछली आ गई।
दयालु राजा ने उस मछली को अपने कमंडल में रख लिया। कुछ ही समय में मछली का आकार इतना बढ़ गया कि पहले कमंडल, फिर सरोवर और अंततः नदी भी उस मछली के लिए छोटी पड़ गई।
जब राजा ने उस मछली को समुद्र में छोड़ दिया, तब वह एक विशाल सुनहरी मछली के रूप में प्रकट हुई। उसने राजा मनु को चेतावनी दी कि पृथ्वी पर जल्द ही महाप्रलय आने वाला है।
भगवान मत्स्य रुपी विष्णु ने मनु से कहा कि वे एक बड़ी नाव तैयार करें जिसमें सभी अनाजों के बीज, औषधियां और सप्तऋषियों को बैठा लें। प्रलय के समय वे वासुकी नाग को रस्सी बनाकर, नाव को मछली के सिर पर बने सींग से बांध दें।
महाप्रलय के दौरान, भगवान मत्स्य रुपी विष्णु ने हयग्रीव नामक दैत्य का वध किया और उसके द्वारा चुराए गए वेदों की रक्षा कर पुनः ब्रह्मा जी को सौंप दिया। साथ ही उस नाव में सभी जीव-जंतुओं के जोड़ों की रक्षा भी कर ली।
इब्राहीमी धर्म; यहूदी, ईसाई और इस्लाम में भी महाप्रलय का उल्लेख मिलता हैं।कहानी इस प्रकार हैं; पृथ्वी पर बुराई और हिंसा बढ़ने के कारण परमेश्वर ने एक भारी प्रलय लाकर समस्त जीवन को नष्ट करने का निर्णय लिया।
नूह को अपने परिवार के साथ-साथ, पृथ्वी के सभी जीव-जंतुओं और पक्षियों की नर-मादा जोड़ी को, जहाज में ले जाने का निर्देश मिला।
जहाज के तैयार होने के बाद, 40 दिनों तक मूसलाधार बारिश हुई, जिससे पूरी पृथ्वी जलमग्न हो गई। केवल नूह का जहाज ही सुरक्षित तैरता रहा।
पानी सूखने के बाद जहाज तुर्की के, माउंट अरात के पास रुका, और यहीं से पृथ्वी पर जीवन की फिर से शुरुआत हुई।
जब महान जलप्रलय समाप्त हुआ और नूह अपने परिवार और जानवरों के साथ नाव से सुरक्षित बाहर आ गए, तब परमेश्वर ने आकाश में पहली बार इंद्रधनुष को स्थापित किया।
भौगोलिक और भूवैज्ञानिक विज्ञान (Geology and Geography) में महाप्रलय या सामूहिक विलुप्तिकरण (Mass Extinction Events) उन कालखंडों को कहा जाता है, जब पृथ्वी की विशाल जैव-विविधता और अधिकांश जीव प्रजातियां बहुत ही कम समय में हमेशा के लिए समाप्त हो गईं। पृथ्वी के इतिहास में अब तक ऐसी 5 सबसे बड़ी महाप्रलय की घटनाएं हुई हैं, जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में “बिग फाइव” (The Big Five) कहा जाता है।
पहली घटना: 44.5 करोड़ वर्ष पूर्व, ऑर्डोविशियन-सिल्यूरियन विलुप्ति के समय, भयंकर हिमयुग (Glaciation) और समुद्र के जलस्तर में भारी गिरावट आकर 85% प्रजातियां नष्ट हुई थी।
दूसरी घटना: 37.5 करोड़ वर्ष पूर्व, लेट डेवोनियन विलुप्ति के समय, महासागरों में ऑक्सीजन की कमी (Anoxia) और वैश्विक तापमान में बदलाव हुआ था जिसमें 75% प्रजातियां नष्ट हुई थी।
तीसरी घटना: 25.2 करोड़ वर्ष पूर्व, पर्मियन-ट्रायसिक विलुप्ति (“ग्रेट डाइंग”) के समय, साइबेरिया के विशाल ज्वालामुखी विस्फोट के कारण भयंकर ग्लोबल वॉर्मिंग और एसिड रेन हुई। जिसमें 90 से 95% प्रजातियां नष्ट हुई थी।
चौथी घटना: 20.1 करोड़ वर्ष पूर्व, ट्रायसिक-जुरासिक विलुप्ति के समय, टेक्टोनिक प्लेटों के खिसकने से बड़े पैमाने पर ज्वालामुखी फटने और कार्बन डाइऑक्साइड के बढ़ने से 80% प्रजातियां नष्ट हुई थी
पाँचवीं घटना: 6.6 करोड़ वर्ष पूर्व, क्रीटेशस-पैलियोजीन विलुप्ति के समय, एक विशाल उल्कापिंड (Asteroid) के पृथ्वी से टकराने से डायनासोरों का अंत हुआ जिसमें 75% प्रजातियां नष्ट हुई थी।
अब तक ली गयी पूरी जानकारी में एक बात गौर करने लायक हैं; धर्म ग्रंथ हो या भौगोलिक विज्ञान हो, किसी भी जानकारी में समूर्ण जीवसृष्टि का विनाश नहीं हुआ था। वैज्ञानिक दर्ज जानकारी में तीसरें महाप्रलय में सबसे ज्यादा जीव नष्ट हुए थे लेकिन उनकी संख्या भी 90 से 95% थी। 5% से 10% जीवसृष्टि फिर भी बची रही थी, अपनी अगली पीढ़ी को अपना अस्तित्व जताने के लिए।
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Author: sarvendra chauhan
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