केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 1 फरवरी 2026 संसद में बजट 2026-27 पेश करते हुए भारतीय रेलवे के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। पर्यावरण के मद्देनज़र और तेज़ यात्री ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए देश में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (बुलेट ट्रेन जैसी हाई-स्पीड रेल लाइनें) विकसित करने की घोषणा की गई है। ये कॉरिडोर प्रमुख शहरों को जोड़ने वाले ‘ग्रोथ कनेक्टर्स’ के रूप में काम करेंगे, जिससे यात्रा समय में भारी कमी आएगी, कार्बन उत्सर्जन घटेगा, सड़क और हवाई अड्डों पर भीड़ कम होगी तथा आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। हालांकि इसके लिए बजट आवंटन कितना है, इसकी जानकारी फिलहाल वित्त मंत्री ने नहीं दी है।
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा, “पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ यात्री परिवहन प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए हम शहरों के बीच 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करेंगे।” ये कॉरिडोर प्रमुख आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक केंद्रों को आपस में जोड़ेंगे।
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हाई स्पीड रेल कॉरिडोर सिर्फ ट्रेनों का विस्तार नहीं है, यह देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर को गति देने की महत्वाकांक्षी योजना है। दरअसल, जब कोई रेल कॉरिडोर तैयार होता है तो उसके ज़रिए बड़े पैमाने पर निर्माण प्रक्रिया चलती है। यह निर्माण सिर्फ रेल कॉरिडोर तक सीमित नहीं रहता है, बल्कि इस कॉरिडोर के रास्ते में आने वाले हर छोटे-बड़े शहर का विकास भी होता है। कॉरिडोर के रास्ते वाले शहरों में निर्माण की प्रक्रिया तेज़ हो जाती है।
7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की पूरी सूची—
7. वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोरः पूर्वी भारत को उत्तर-पूर्व से जोड़ेगा, सिलीगुड़ी (उत्तर-पूर्व का गेटवे) के माध्यम से क्षेत्रीय एकीकरण बढ़ाएगा।
Author: sarvendra chauhan
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