स्कंद पुराण के अनुसार जानिए दीपदान का महत्व, पूजा विधि और भगवान शिव की विशेष कृपा पाने के उपाय
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस पूरे माह में शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र जाप और दीपदान का अत्यधिक महत्व बताया गया है। सनातन धर्म के अनुसार बिना दीपक जलाए कोई भी पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। स्कंद पुराण सहित अनेक धार्मिक ग्रंथों में भगवान शिव के समक्ष विभिन्न प्रकार के तेल एवं घी के दीपक जलाने का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि श्रद्धा, विश्वास और विधि-विधान से दीपक अर्पित करने पर भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
आइए विस्तार से जानते हैं कि सावन में कौन-कौन से दीपक जलाने चाहिए, उनका धार्मिक महत्व क्या है और दीपदान करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
1. सावन का धार्मिक महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार सावन माह भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले कालकूट विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। विष की तीव्रता को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर गंगाजल अर्पित किया। तभी से सावन में जलाभिषेक की परंपरा प्रारंभ हुई।
इस माह में शिव भक्त उपवास रखते हैं, कांवड़ यात्रा करते हैं, रुद्राभिषेक कराते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग तथा पुष्प अर्पित करते हैं। सावन का प्रत्येक सोमवार विशेष फलदायी माना जाता है। इस दौरान किया गया जप, तप, दान और पूजा कई गुना अधिक फल देने वाली मानी जाती है।
2. दीपक जलाने की परंपरा क्यों है
सनातन धर्म में दीपक केवल प्रकाश का साधन नहीं बल्कि ज्ञान, सकारात्मक ऊर्जा और ईश्वर की उपस्थिति का प्रतीक माना गया है। पूजा के समय दीपक जलाने का अर्थ है अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करके जीवन में ज्ञान और आध्यात्मिक प्रकाश का स्वागत करना।
भगवान शिव के सामने दीपक जलाने से वातावरण पवित्र होता है और मन एकाग्र होकर पूजा में लगता है। धार्मिक मान्यता है कि दीपक की लौ में देवशक्ति का वास होता है। इसलिए प्रत्येक पूजा, आरती और यज्ञ की शुरुआत दीप प्रज्वलन से की जाती है।
3. स्कंद पुराण में दीपदान का महत्व
स्कंद पुराण में दीपदान को अत्यंत पुण्यदायी कर्म बताया गया है। इसमें कहा गया है कि भगवान शिव के समक्ष उचित तेल अथवा घी का दीपक जलाने से पापों का क्षय होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
दीपदान के प्रमुख लाभ—
- भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
- आर्थिक उन्नति के मार्ग खुलते हैं।
- मानसिक तनाव कम होता है।
- आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है।
- परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
- ग्रह दोषों की शांति में भी सहायता मिलती है।
4. कुसुम तेल का दीपक
स्कंद पुराण में कुसुम (सैफ्लॉवर) के तेल का दीपक अत्यंत शुभ माना गया है।
धार्मिक मान्यता
भगवान शिव के समक्ष कुसुम तेल का दीपक जलाने से जीवन में वैभव, सम्मान और समृद्धि का आगमन होता है।
संभावित लाभ
- आर्थिक उन्नति
- घर में सुख-शांति
- व्यवसाय में सफलता
- परिवार में प्रेम
- सकारात्मक ऊर्जा
यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहा है तो सावन में प्रतिदिन श्रद्धा से कुसुम तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
5. अलसी तेल का दीपक
अलसी का तेल भी धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
धार्मिक महत्व
स्कंद पुराण में कहा गया है कि अलसी तेल का दीपक जलाने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और साधक को आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है।
संभावित लाभ
- मानसिक शांति
- सकारात्मक विचार
- आध्यात्मिक उन्नति
- तनाव में कमी
- परिवार में सौहार्द
सुबह या शाम दोनों समय अलसी तेल का दीपक जलाया जा सकता है।
6. तिल तेल का दीपक
तिल का तेल सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है।
धार्मिक मान्यता
तिल का दीपक जलाने से भगवान शिव के साथ-साथ पितरों का भी आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है।
संभावित लाभ
- आध्यात्मिक ज्ञान
- ग्रह दोषों में शांति
- नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा
- मानसिक स्थिरता
- आत्मविश्वास में वृद्धि
सावन सोमवार के दिन तिल के तेल का दीपक विशेष शुभ माना जाता है।
7. घी का दीपक
सभी प्रकार के दीपकों में घी का दीपक सर्वोत्तम माना गया है।
धार्मिक महत्व
घी का दीपक भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। इससे पूजा पूर्ण मानी जाती है।
संभावित लाभ
- भगवान शिव की विशेष कृपा
- मनोकामना पूर्ति
- पारिवारिक सुख
- धन-धान्य में वृद्धि
- आध्यात्मिक शुद्धि
यदि संभव हो तो गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाना अधिक शुभ माना जाता है।
8. दीपक जलाते समय किन बातों का रखें ध्यान
- स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थान को साफ रखें।
- दीपक पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें (स्थानीय परंपरा के अनुसार)।
- दीपक जलाते समय मन शांत रखें।
- भगवान शिव का स्मरण करें।
- दीपक बुझाने के लिए फूंक न मारें।
- पूजा समाप्त होने तक दीपक जलने दें।
- दीपक के साथ धूप, कपूर और अगरबत्ती भी जला सकते हैं।
- बेलपत्र, जल और पुष्प अवश्य अर्पित करें।
9. सावन में कौन-कौन से मंत्र बोलें
पूजा के समय इन मंत्रों का जप करना शुभ माना जाता है—
ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय
यह भगवान शिव का सबसे प्रसिद्ध पंचाक्षरी मंत्र है।
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
शिव गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
रुद्र मंत्र
ॐ नमो भगवते रुद्राय।
हर हर महादेव
पूजा और आरती के समय श्रद्धा से “हर हर महादेव” का उच्चारण भी शुभ माना जाता है।
10. निष्कर्ष
सावन केवल एक धार्मिक महीना नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, भक्ति और आध्यात्मिक जागरण का पावन अवसर है। इस दौरान भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और दीपदान करने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुसुम, अलसी, तिल के तेल तथा घी का दीपक श्रद्धापूर्वक जलाने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति, समृद्धि तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
हालांकि धार्मिक ग्रंथों में वर्णित इन मान्यताओं को श्रद्धा और आस्था के संदर्भ में देखा जाता है। पूजा का सबसे महत्वपूर्ण आधार सच्ची भक्ति, सदाचार और निष्कपट भाव माना गया है। यदि श्रद्धा, विश्वास और सेवा-भाव के साथ भगवान शिव की आराधना की जाए, तो सावन का यह पावन महीना जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति का माध्यम बन सकता है।
हर हर महादेव! 🙏
Author: sarvendra chauhan
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