Part – 13 pm ke pen se bate brahma puran ki :- जन्हु, जान्हवी, कावेरी का वर्णन

जन्हु, जान्हवी, कावेरी का वर्णन
एक  बार गंगा जन्हु ऋषि को अपना पति बनाने की इच्छा से उनके पास चली गई। पर जन्हु ऋषि ने उसका प्रस्ताव ठुकरा दिया और उसे अपनी पत्नी बनाने से इंकार किया। इस बात से क्रोधित हो गंगा ने उनकी यज्ञशाला बहा दी। अपनी यज्ञशाला बहते देख जन्हु ऋषि कुपित हुए और उसका घमंड तोड़ने के लिए उसका सारा जल पी लिया।
यह सब देख महर्षियों ने प्रार्थना करके गंगा को जन्हु की पुत्री के रूप में प्राप्त किया।
तब से गंगा जान्हवी कहलाने लगी।
इसके बाद जन्हु ने युवनाश्व की कन्या कावेरी से विवाह किया। युवनाश्व के शाप की वजह से गंगा अपने आधे स्वरूप से कावेरी में मिल गयी थी।
जन्हुने कावेरी के गर्भ से सुनद्य नाम के धार्मिक पुत्र को जन्म दिया। सुनद्य के पुत्र अजक हुए, अजक के बलाकाश्व और बलाकाश्व के पुत्र कुश हुए। कुश के देवताओं के समान तेजस्वी चार पुत्र हुए- कुशिक, कुशनाभ, कुशाम्ब और मूर्तिमान। राजा कुशिक वन में रहकर ग्वालों के साथ पले थे। उन्होंने इन्द्र के समान पुत्र प्राप्त करने की इच्छा से तप किया। एक हजार वर्ष पूर्ण होनेपर इन्द्र भयभीत होकर उनके पास आये। उन्होंने स्वयं अपने को ही उनके पुत्र रूप में प्रकट किया। उस समय वे राजा गाधि के नाम से प्रसिद्ध हुए। कुशिक की पत्नी पौरा थी। उसी के गर्भ से गाधि का जन्म हुआ था। गाधि के एक परम सौभाग्यशालिनी कन्या हुई, जिसका नाम सत्यवती था। गाधि ने उस कन्या का विवाह शुक्राचार्य के पुत्र ऋचीक के साथ किया था।
अधिक जानकारी
1. सर्पमेध – सर्पमेध की जानकारी सर्प सत्र नाम से भी मिलती हैं। इसे सर्प जाती को समाप्त करने के लिए किया जाता हैं। दूसरी जानकारी के मुताबिक तक्षक सर्प को आहुति बनाने के उद्देश्य से यह यज्ञ किया गया था। ब्रम्हपुराण किताब में सिर्फ यज्ञ का नाम लिखा गया हैं, यज्ञ का उद्देश्य नहीं लिखा गया हैं।
2. जाह्नवी नदी – जाह्नवी नदी, जिसे जाध गंगा या जटा गंगा भी कहा जाता है, भारत के उत्तराखंड राज्य में भागीरथी नदी की एक सहायक नदी है। यह भागीरथी नदी की एक महत्वपूर्ण उपनदी है, जो गंगा नदी की एक मुख्य उपनदी है और हिन्दू धर्म में पवित्र मानी जाती है। इसका उद्गम तिब्बत से होता हैं।
3.  गंगा और कावेरी – गंगा और कावेरी नदियों के बीच कोई भौतिक संगम नहीं है। गंगा उत्तर भारत की एक प्रमुख नदी है, जबकि कावेरी दक्षिण भारत की एक नदी है। वे अलग-अलग दिशाओं में बहती हैं और अंततः अलग-अलग स्थानों पर बंगाल की खाड़ी में मिलती हैं।
गंगा: गंगा नदी हिमालय से निकलती है और उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों से होकर बहती है।
कावेरी: कावेरी नदी पश्चिमी घाट से निकलती है और दक्षिण भारत में कर्नाटक और तमिलनाडु के राज्यों से होकर बहती है।
हालांकि, “गंगा कावेरी संगम” वाक्यांश का उपयोग कई संदर्भों में किया जाता है।
“जान्हवी कावेरी संगम” एक साहित्यिक और सांस्कृतिक संदर्भ है, जो दो प्रसिद्ध भारतीय नदियों- जान्हवी (गंगा) और कावेरी के मिलन को संदर्भित करता है।
इस भाग में इतना ही

हमारें वीडियो और पोस्ट में दी जानेवाली जानकारी को देखने और ड्राफ्ट को कॉपी पेस्ट करने के लिए आप हमारे यूट्यूब चैनल, ब्लॉग, फेसबुक, न्यूज वेबसाइट को विजिट कर सकते हैं।

उनमें लिखें टेक्स्ट को कॉपी पेस्ट करके अपने लिए नोट्स बना सकते हैं।

यदि फिर भी कोई समस्या आ रही हैं तो वीडियो और पोस्ट में दी गयी मेल आईडी पर मेल करें, हम यथासंभव सभी को जानकारी देने की कोशिश करेंगे।

ज्योतिष संबंधी मेल आईडी- pmsastrology01@gmail.com

धर्मग्रंथ संबंधी मेल आईडी- dharmgranthpremi@gmail.com

आप फोन करेंगे और हम बिजी रहेंगे तो बात नहीं हो पायेगी, इसलिए मेल आईडी पर ही अपने सवाल पूछे या सोशल मीडिया पर मैसेज करें।

हमें जब भी वक़्त मिलेगा रात-देर रात आपके सवालों का जवाब देने की कोशिश करेंगे।

हमारे कंटेंट को ढूंढने के लिए कुछ आसान कीवर्ड्स इस प्रकार हैं-

pm ke pen se brahma puran

pm ke pen se tarot card

pm ke pen se kundali jyotish

धन्यवाद।

1 thought on “Part – 13 pm ke pen se bate brahma puran ki :- जन्हु, जान्हवी, कावेरी का वर्णन”

Leave a Comment

Read More