ग्रहों के आपसी संबंध आदि की जानकारी
सूर्य
सूर्य के मित्रग्रह हैं चंद्र, मंगल और गुरु।
उसके लिए बुध समग्रह हैं।
शुक्र और शनि को सूर्य अपना शत्रुग्रह मानता हैं।
मंगल की मेष राशि में वह उच्च होता हैं और शुक्र की तुला राशि में वह नीच होता हैं।
यहाँ राहु-केतु का जिक्र नहीं हुआ हैं, इसलिए बता दे कि सूर्य की राहु या केतु से युति होने से ग्रहण योग बनता हैं।
चंद्र
चंद्र के मित्रग्रह सूर्य और बुध हैं।
मंगल, गुरु, शुक्र, शनि को वह समग्रह मानता हैं।
चंद्र किसी ग्रह को अपना शत्रु नहीं मानता।
शुक्र की वृषभ राशि में वह उच्च और मंगल की वृश्चिक राशि में नीच होता हैं।
सूर्य की तरह चंद्र के साथ राहु या केतु की युति से ग्रहण योग बनता हैं।
मंगल
मंगल के लिए सूर्य, चंद्र, गुरु मित्रग्रह हैं।
शुक्र और शनि को वह सम मानता हैं।
बुधग्रह उसके लिए शत्रु हैं।
ध्यान रहें, मंगल के लिए चंद्र मित्र होते हुए भी उसकी कर्क राशि में वह नीच होता हैं। शनि की मकर राशि में वह उच्च होता हैं।
बुध
बुध सूर्य और शुक्र को अपना मित्रग्रह मानता हैं।
मंगल, गुरु और शनि को वह समग्रह मानता हैं।
चंद्र को अपना शत्रु मानता हैं।
बुध खुद की कन्या राशि में उच्च होता हैं। गुरु को समग्रह मानता हैं लेकिन उसकी मीन राशि में वह नीच होता हैं।
गुरु
गुरु सूर्य, चंद्र और मंगल को अपना मित्रग्रह मानता हैं।
शनि को समग्रह मानता हैं।
बुध और शुक्र को शत्रुग्रह मानता हैं।
चंद्र की कर्क राशि में वह उच्च होता हैं। शनि को समग्रह मानता हैं लेकिन उसकी मकर राशि में नीच होता हैं।
यहाँ राहु-केतु का जिक्र नहीं हुआ हैं इसलिए जान ले कि, गुरु के साथ राहु या केतु की युति से चांडाल योग बनता हैं।
शुक्र
शुक्र बुध और शनि को अपना मित्रग्रह मानता हैं।
मंगल और गुरु को समग्रह मानता हैं।
सूर्य और चंद्र को वह शत्रु मानता हैं।
शुक्र गुरु को समग्रह मानता हैं लेकिन उसकी मीन राशि में वह उच्च होता हैं। बुध को वह मित्र मानता हैं लेकिन उसकी कन्या राशि में वह नीच होता हैं।
शनि
शनि बुध और शुक्र को अपना मित्रग्रह मानता हैं।
गुरु को समग्रह मानता हैं।
सूर्य, चंद्र और मंगल को अपना शत्रुग्रह मानता हैं।
शनि तुला राशि में उच्च होता हैं और मेष राशि में नीच होता हैं।
राहु
राहु शुक्र और शनि को अपना मित्रग्रह मानता हैं।
बुध और गुरु को समग्रह मानता हैं।
सूर्य, चंद्र और मंगल को वह शत्रुग्रह मानता हैं।
राहु मिथुन राशि में मतभेद से वृषभ राशि में उच्च होता हैं। धनु या वृश्चिक राशि में नीच होता हैं।
केतु
केतु सूर्य, चंद्र और मंगल को अपना मित्रग्रह मानता हैं।
बुध और गुरु को समग्रह मानता हैं।
शुक्र और शनि को वह शत्रुग्रह मानता हैं।
केतु धनु राशि में मतभेद से वृश्चिक में उच्च माना जाता हैं। मिथुन या वृषभ राशि में नीच माना जाता हैं।
नोट – ध्यान रहें राहु और केतु को लेकर अनेकों मतभेद हैं।
मैत्रीचक्र तो हमने जान लिया हैं। अब आईये इनकी परम मित्रता और शत्रुता भी जान लेते हैं।
परममित्र
सूर्य के लिए मंगल।
गुरु के लिए चंद्र।
शनि के लिए राहु परममित्र ग्रह हैं।
परमशत्रु
सूर्य के लिए शनि और राहु।
गुरु के लिए शुक्र।
बुध के लिए चंद्र परमशत्रु ग्रह हैं।
आज के लिए इतना ही।
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Author: sarvendra chauhan
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