ITR Revised Return 2026: ITR फाइल करने के बाद गलती हो गई? जानिए Revised Return फाइल करने का पूरा नियम, समय सीमा और जरूरी दस्तावेज
नई दिल्ली। अगर आपने 31 जुलाई की अंतिम तिथि से पहले अपना Income Tax Return (ITR) दाखिल कर दिया है, लेकिन बाद में पता चला कि रिटर्न में कोई जानकारी गलत दर्ज हो गई है या कोई महत्वपूर्ण आय, बैंक खाता, टैक्स डिटेल या छूट (Deduction) छूट गई है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आयकर विभाग करदाताओं को ऐसी गलतियों को सुधारने का अवसर देता है।
इसके लिए Revised Return (संशोधित आयकर रिटर्न) की सुविधा उपलब्ध है। इस सुविधा के माध्यम से करदाता पहले से दाखिल किए गए ITR में सुधार कर सकते हैं। हालांकि यह सुविधा कुछ निर्धारित नियमों और शर्तों के अधीन होती है। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि Revised Return कौन भर सकता है, कब भर सकता है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
क्या होता है Revised Return?
Revised Return का अर्थ है पहले से दाखिल किए गए आयकर रिटर्न में सुधार करना।
यदि ITR भरते समय—
- कोई आय (Income) छूट गई हो
- बैंक अकाउंट गलत दर्ज हो गया हो
- गलत टैक्स छूट (Deduction) क्लेम हो गई हो
- गलत HRA या अन्य जानकारी भर दी गई हो
- किसी निवेश की जानकारी छूट गई हो
तो ऐसी स्थिति में Revised Return दाखिल किया जा सकता है।
Revised Return क्यों जरूरी है?
गलत जानकारी के साथ ITR फाइल करने पर भविष्य में कई समस्याएं आ सकती हैं।
जैसे—
- Income Tax Notice
- Refund रुक सकता है
- अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है
- Penalty लग सकती है
- Scrutiny की संभावना बढ़ सकती है
इसलिए गलती का पता चलते ही उसे सुधार लेना बेहतर माना जाता है।
कौन कर सकता है Revised Return फाइल?
आयकर अधिनियम की धारा 139(5) के अनुसार—
यदि करदाता ने निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना Original Return दाखिल किया है, तो वह बाद में Revised Return दाखिल कर सकता है।
किन गलतियों को सुधारा जा सकता है?
Revised Return के माध्यम से निम्न गलतियां सुधारी जा सकती हैं—
- Salary Income
- Interest Income
- Rental Income
- Capital Gain
- Foreign Income
- Bank Account Details
- Aadhaar/PAN Details
- TDS Credit
- Tax Deduction
- Investment Details
- HRA Claim
- Section 80C, 80D आदि की कटौतियां
किन दस्तावेजों का मिलान जरूरी है?
Revised Return भरने से पहले निम्न दस्तावेजों का मिलान अवश्य करें—
✔ Form-16
वेतन और TDS की जानकारी।
✔ AIS (Annual Information Statement)
सभी Financial Transactions की जानकारी।
✔ TIS (Taxpayer Information Summary)
आय का सारांश।
✔ Form 26AS
TDS, TCS और Advance Tax की जानकारी।
✔ Bank Statement
ब्याज और अन्य लेनदेन।
✔ PAN एवं Aadhaar
दोनों की जानकारी सही होनी चाहिए।
Revised Return कैसे भरें?
Step-1
Income Tax e-Filing Portal पर लॉगिन करें।
Step-2
e-File → Income Tax Return चुनें।
Step-3
Filed Return देखें।
Step-4
Revised Return विकल्प चुनें।
Step-5
गलत जानकारी सुधारें।
Step-6
सभी विवरण दोबारा जांचें।
Step-7
Return Submit करें।
Step-8
OTP के माध्यम से Verification करें।
क्या बार-बार Revised Return भर सकते हैं?
हां।
यदि पहली बार Revised Return भरने के बाद भी कोई गलती रह जाती है, तो दोबारा भी Revised Return दाखिल किया जा सकता है।
लेकिन—
बार-बार बड़े बदलाव करने पर आयकर विभाग अतिरिक्त जांच कर सकता है।
किन गलतियों से बचना चाहिए?
- गलत PAN
- गलत बैंक खाता
- गलत IFSC
- गलत Income
- गलत Tax Credit
- गलत Deduction
- गलत HRA
- गलत Capital Gain
यदि गलती नहीं सुधारी तो क्या होगा?
यदि गलती समय रहते नहीं सुधारी गई तो—
- Income Tax Notice
- Refund Delay
- Interest
- Penalty
- Scrutiny
- अतिरिक्त टैक्स
जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
Tax Experts क्या सलाह देते हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि ITR दाखिल करने के बाद भी एक बार सभी दस्तावेजों का मिलान जरूर करें।
विशेष रूप से—
- AIS
- TIS
- Form-26AS
- Form-16
- Bank Statement
इनका मिलान करने से अधिकांश गलतियां पकड़ में आ जाती हैं।
क्या हर गलती Revised Return से ठीक हो सकती है?
अधिकांश सामान्य गलतियां सुधारी जा सकती हैं।
लेकिन जानबूझकर गलत जानकारी देना, फर्जी दस्तावेज लगाना या टैक्स चोरी करना गंभीर मामला हो सकता है।
ITR भरते समय इन बातों का रखें ध्यान
- सभी बैंक खाते जोड़ें।
- ब्याज आय शामिल करें।
- सही ITR Form चुनें।
- PAN और Aadhaar Verify करें।
- मोबाइल नंबर अपडेट रखें।
- ईमेल सही रखें।
- Verification अवश्य करें।
निष्कर्ष
अगर आपने समय सीमा के भीतर ITR दाखिल कर दिया है और बाद में कोई गलती सामने आती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आयकर विभाग की Revised Return सुविधा आपको अपनी त्रुटियों को सुधारने का अवसर देती है। हालांकि, संशोधित रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी दस्तावेजों का सावधानीपूर्वक मिलान करना चाहिए ताकि भविष्य में किसी नोटिस या अतिरिक्त जांच की संभावना कम हो।
Author: sarvendra chauhan
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