IPO Alert : सॉफ्टबैंक समर्थित ई-कॉमर्स कंपनी मीशो के शेयर ने आज 10 दिसंबर को स्टॉक मार्केट में मजबूत लिस्टिंग की है. आईपीओ में अपर प्राइस बैंड 111 रुपये था, जबकि कंपनी का स्टॉक बीएसई पर 161 रुपये के भाव पर लिस्ट हुआ है.
Meesho Stock Market Listing Today : सॉफ्टबैंक समर्थित ई-कॉमर्स कंपनी मीशो के शेयर ने आज 10 दिसंबर को स्टॉक मार्केट में मजबूत लिस्टिंग की है. आईपीओ (IPO) में अपर प्राइस बैंड 111 रुपये था, जबकि कंपनी का स्टॉक बीएसई पर 161 रुपये के भाव पर लिस्ट हुआ है. इस लिहाज से आईपीओ में शेयर पाने वाले निवेशकों को लिस्टिंग पर 45 फीसदी रिटर्न मिल गया है. इस पब्लिक इश्यू को निवेशकों की ओर से मजबूत रिस्पांस मिला था, वहीं ग्रे मार्केट प्रीमियम भी हाई लिस्टिंग गेंस के संकेत दे रहा था. ब्रोकरेज हाउस कंपनी के आउटलुक को लेकर पॉजिटिव हैं.
Meesho IPO : 82 गुना हुआ था सब्सक्राइब
मीशो के आईपीओ (IPO) को निवेशकों की ओर से बंपर रिस्पांस मिला था. यह आईपीओ ओवरआल 82 गुना सब्सक्राइब हुआ है. इसे रिटेल कैटेगरी में 19.89 गुना बोली मिली है. एनआईआई कैटेगरी में यह 39.85 गुना सब्सक्राइब हुआ और क्यूआईबी कैटेगरी में 123.34 गुना सब्सक्रिप्शन मिला.
SBI सिक्योरिटीज : आउटलुक पर राय
SBI सिक्योरिटीज के अनुसार, Meesho जीरो-कमीशन मॉडल पर काम करती है और उसकी अधिकतर कमाई लॉजिस्टिक्स और विज्ञापन से होती है. कंपनी अभी भी कुल मिलाकर नुकसान में है (विशेष खर्च हटाने के बाद भी), लेकिन पिछले दो सालों से यह पॉजिटिव फ्री कैश फ्लो बना रही है.
Arihant Capital : आउटलुक पर राय
अरिहंत कैपिटल के एनालिस्ट ने कहा कि Meesho का आउटलुक मजबूत है. इसका कारण है, कंपनी का बढ़ता हुआ स्केल, Meesho AI Labs की मदद से AI आधारित दक्षता, और नए ग्रोथ एरिया जैसे कॉन्टेंट कॉमर्स, Meesho Mall, और फाइनेंशियल सर्विसेज के पायलट प्रोजेक्ट.
भारत में कॉन्टेंट कॉमर्स की पहुंच अभी भी चीन की तुलना में बहुत कम है, इसलिए Meesho के पास इस क्षेत्र में बढ़ने का बड़ा मौका है, खासकर क्योंकि वह Tier-2 और उससे छोटे शहरों के बाजारों पर ध्यान दे रही है, जहां 692–706 मिलियन स्मार्टफोन यूज़र्स मौजूद हैं.
कंपनी के साथ जुड़े रिस्क फैक्टर्स?
Meesho को अभी भी लगातार मुनाफे की ओर बढ़ने का स्पष्ट रास्ता बनाना होगा.
बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा है.
नए ग्राहकों को जोड़ने की लागत जल्दी बढ़ सकती है.
सेलर्स की क्वालिटी का प्रबंधन एक चुनौती बना रहता है.
रिटर्न रेट, लॉजिस्टिक खर्च और वर्किंग कैपिटल को नियंत्रण में रखना जरूरी होगा, तभी कैश फ्लो सुधर सकता है.
(Disclaimer: यहां आईपीओ के बारे में जानकारी दी गई है. आईपीओ को लेकर सलाह ब्रोकरेज हाउस के हवाले से दी गई है. यह फाइनेंशियल एक्सप्रेस के निजी विचार नहीं है. बाजार में जोखिम होते हैं, इसलिए निवेशके पहले एक्सपर्ट की राय लें.)
Author: sarvendra chauhan
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