भाव एक के सूर्यफल
इस भाग में हम कुंडली के भाव एक के सूर्यफल की जानकारी लेनेवाले हैं।
जातक स्वाभिमानी, क्रोधी, तुनकमिजाज, चिड़चिड़ा, संवेदनशील हो सकता हैं।
पहले भाव का सूर्य आत्मबल, इच्छाशक्ति, भाग्य, सत्ता, उच्च अधिकार, प्रगति, प्रमोशन, सरकारी लाभ, वीरता, प्रताप आदि फल प्रदान करता हैं।
सूर्य का बुध, गुरु के साथ संबंध आने पर धन और विद्वता मिल सकती हैं।
कन्या राशि का सूर्य कन्या संतति अधिक दे सकता हैं।
मकर राशि का सूर्य पुरुष जातक को स्त्रियों में और स्त्री जातकों को पुरुषों में रत रख सकता हैं।
मंगल, बुध, गुरु ग्रह शुभ स्थिति में होने पर उच्च शिक्षा, उच्च अधिकार, उच्चाधिकारियों से संबंध, एकाधिक इन्कम सोर्स, उदारता, भूमि-भवन-संपन्नता, राजकीय एवं प्रशासकीय उच्च पद दे सकता हैं।
वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुंभ, मीन लग्नस्थ सूर्य का शनि, राहु, केतु से संबंध होने पर क्रोध, कटुता, अधीरता, उग्रता, अस्थिरता, पारिवारिक मनमुटाव, आर्थिक समस्या आदि फल दे सकता हैं।
बलवान सूर्य केंद्र त्रिकोण का स्वामी होकर लग्नभाव में स्थित हो तो शक्ति और ऊर्जा प्रदान करता हैं।
(सूर्य वृषभ लग्न में चतुर्थ केंद्र का, कुंभ में में सप्तम का, वृश्चिक लग्न में दशम केंद्र का स्वामी बनेगा। त्रिकोण का स्वामी वह मेष लग्न में पंचम और धनु लग्न में नवम का बनेगा।)
निर्बल तथा अशुभ प्रभावी सूर्य अहंकार, घमंड, झूठी तारीफ, झूठी शान, बड़प्पन, आलस, माँफी न देनेवाला स्वभाव, निर्धनता, उच्च शिक्षा में बाधाएं, धनलाभ में कठिनाई, दुर्घटना, पत्नी और संतति को पीड़ा, नजदीकी रिश्तेदारों के साथ झगड़े आदि फल देता हैं।
प्रथम भाव में सूर्य वायु संबंधी रोग, सिर दर्द, बुखार दे सकता हैं। सूर्य का मंगल शनि से अशुभ प्रभाव होने पर रक्तदोष, उच्च रक्तचाप उत्पन्न होता हैं। शूक्र के साथ अशुभ संबंध होने पर पिता को कष्ट हो सकते हैं। शत्रु राशिस्थ सूर्य नेत्र रोग दे सकता हैं। स्वग्रही सूर्य रतौंधी दे सकता हैं। मकर राशि का सूर्य हृदयरोग दे सकता हैं।
पहले भाव के लिए सूर्य के कुछ उपाय इस प्रकार हैं-
1. रविवार के दिन विष्णु पूजन-अनुष्ठान करें।
2. रविवार को देसी खांड, मसूर दाल, शहद दान करें।
3. अनाज, नारियल, तेल बादाम, उड़द आदि का दान करें।
4. शराब, मांस, मछली का सेवन न करें।
5. पैतृक मकान में पूर्व-उत्तर कोने पर पानी की व्यवस्था करें।
6. 24 वर्ष की आयु के पहले शादी करें।
7. दिन में सम्भोग न करें।
8. सूर्य नमस्कार करें।
नोट: रत्न उपाय करने के लिए संपूर्ण कुंडली का अध्ययन करें उसके बिना रत्न उपाय ना करें।
नोट: देश परत्वे शारिरीक बनावट अलग हो सकती हैं इसलिए हमने शारीरिक लक्षणों को शामिल नहीं किया हैं।
नोट: किसी भी ग्रह की केवल एक स्थिति देखकर उसकी पूर्ण भविष्यवाणी नहीं कि जाती। उसपर पड़नेवाले शुभ-अशुभ प्रभाव, युति, दृष्टि, राशि, नक्षत्र, अंश, बलाबल सारी बातों का ध्यान रखना पड़ता हैं।
इस भाग में इतना ही।
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धन्यवाद!
Author: sarvendra chauhan
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