आयु के उनकी पत्नी स्वरभानु कुमारी प्रभा के गर्भ से पाँच पुत्र उत्पन्न हुए। वे सभी वीर और महारथी थे। पहले नहुष का जन्म हुआ। उनके बाद वृद्धशर्मा, रंभ, रजि और अनेना का जन्म हुआ।
रजि ने पांच सौ पुत्रों को जन्म दिया। वे सभी राजेय क्षत्रिय के नाम से विख्यात हुए। उनसे इन्द्र भी डरते थे।
पूर्वकाल में देवताओं तथा असुरों में भयंकर युद्ध आरम्भ होने पर दोनों पक्षों के लोगों ने ब्रह्माजी से पूछा- ‘भगवन! आप सब भूतों के स्वामी हैं; बताइये, हमारे युद्ध में कौन विजयी होगा?
ब्रह्माजीने कहा- राजा रजि हाथ में हथियार लेकर जिनके लिये युद्ध करेंगे, वे निःसंदेह तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। जिस पक्ष में रजि हैं, उधर ही धृति है। जहाँ (1. अ. जा.) धृति है, वहीं लक्ष्मी है तथा जहाँ धृति और लक्ष्मी हैं, वहीं धर्म एवं विजय है।
यह सुनकर देवता और दानव प्रसन्न हो राजा रजि के पास गये तब रजि ने शर्त रखी के ‘मुझे अगर इंद्र बनाया जायेगा तो ही मैं तुम्हारी ओर से लड़कर दैत्यों को हरा दूँगा।’ देवताओं ने उसकी शर्त को मान लिया।
देवताओं द्वारा शर्त मान लेने के बावजूद राजी ने ये शर्त असुरों के सामने भी रखी पर असुरों ने शर्त ठुकराकर उनको कहा तुम इस युद्ध में चुपचाप खड़े रहो। हमारे इंद्र तो (2. अ. जा.) प्रल्हाद ही होंगे।
तब रजि में दानवों से युद्ध करके उन्हें हरा दिया।
युद्धपश्चात देवताओं सहित देवेंद्र खुद युद्धिविजयी रजि के पास गये और खुद को उनका पुत्र घोषित करके उन्हें कहा, ‘आप ही हमारे इंद्र हैं, में आज से आपका पुत्र कहलाऊंगा।’
इंद्र की बात सुनकर रजि बहुत प्रसन्न हुए।
अधिक जानकारी
1. धृति – धृति का अर्थ हैं धैर्य, धीरज, स्थिरता।
2. प्रल्हाद – महाभारत में धृतरष्ट द्वारा भी इस घटना का उल्लेख किया गया हैं कि प्रल्हाद ने अपनी शक्तियों से तीनों लोकों को जीत लिया था और इंद्र से उसका राज्य छीन लिया था।
यह वही प्रल्हाद था जो हिरण्यकश्यप का पुत्र था और भक्त प्रल्हाद के नाम से प्रसिद्ध था।
जब वह बालक था तब उसके पिता हिरण्यकश्यप के अन्याय, अत्याचार से बचाने के लिए खुद भगवान विष्णु ने नरसिम्हा अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया था और भक्त प्रल्हाद की जान बचायी थी।
वहीं बच्चा बड़ा होकर इंद्र का राज्य छीन लेता हैं। उसकी सेना और देवताओं में युद्ध होता हैं, राजा रजि की मदद से देवता उसी प्रल्हाद को हराकर फिर अपने राज्य को प्राप्त कर लेते हैं।
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