भाग 23 pm ke pen se bate brahma puran ki तुर्वसु और अनु वंश

तुर्वसु और अनु वंश

हम सिर्फ उन्हीं कहानी और घटनाओं का जिक्र कर रहे हैं जिनमें उनसे संबंधित अधिक जानकारी हमारे पास उपलब्ध होती हैं। इसलिए आखिरी भाग के बाद कुछ हिस्से छोड़कर आज हम तुर्वसु और अनु वंश की जानकारी लेनेवाले हैं।

ब्रम्हपुराण सुनाते हुए लोमहर्षनजी आगे का वर्णन करने लगे।

तुर्वसु के पुत्र वह्नि, वह्नि के गोभानु, गोभानु के राजा त्रैशानु, त्रैशानु के करंधम तथा करंधम के मरुत्त हुए। अवीक्षित नन्दन राजा मरुत्त इस मरुत्त से भिन्न हैं।

करंधम कुमार मरुत्त के कोई पुत्र नहीं था। उन्होंने बहुत दक्षिणा देकर यज्ञ किया, उसमें उन्होंने दक्षिणा के रूप में महात्मा संवर्त को अपनी संयता नाम की कन्या दे दी।

तत्पश्चात उन्होंने पूरुवंशी दुष्यन्त को गोद ले लिया। इस प्रकार ययाति के शापवश जब तुर्वसु का वंश नहीं चला, तब उस में पौरव वंश का प्रवेश हुआ।

दुष्यन्त के पुत्र राजा करूरोम हुए। करूरोम से अहीद की उत्पत्ति हुई। अहीद के चार पुत्र हुए-पाण्ड्य, केरल, कोल तथा चोल।

दुह्य के पुत्र बभ्रुसेतु, बभ्रुसेतु के अङ्गारसेतु और अङ्गारसेतु के मरुत्पति हुए, जो युद्ध में युवनाश्वकुमार मान्धाता के हाथ से मारे गये। अङ्गारसेतु के पुत्र राजा गान्धार हुए, जिनके नामपर (1. अ. जा.) गान्धार प्रदेश विख्यात है। (2. अ. जा.) गान्धार देश के घोड़े सब घोड़ों से अच्छे होते हैं।

अनु के पुत्र धर्म, धर्म के द्यूत, द्यूत के वनदुह, वनदुह के प्रचेता और प्रचेता के सुचेता हुए। ये अनु के वंशज बतलाये गये।

यदु के पाँच पुत्र हुए, जो देवकुमारों के समान सुन्दर थे। उनके नाम हैं- सहस्त्राद, पयोद, क्रोष्टु, नील और अञ्जिक।

सहस्त्राद के तीन परम धर्मात्मा पुत्र हुए-हैहय, हय तथा वेणुहय। हैहय का पुत्र धर्मनेत्र हुआ। धर्मनेत्र के कार्त और कार्त के साहञ्ज नामक पुत्र हुए।

साहञ्जने (3. अ. जा.) साहञ्जनी नाम की नगरी बसायी। साहञ्ज का दूसरा नाम महिष्मान भी था। उनके पुत्र प्रतापी भद्रश्रेण्य थे। भद्रश्रेण्य के दुर्दम और दुर्दम के कनक हुए। कनक के चार पुत्र हुए, जो सम्पूर्ण विश्व में विख्यात थे। उनके नाम इस प्रकार हैं- कृतवीर्य, कृतौजा, कृतधन्वा तथा कृताग्नि।

अधिक जानकारी

1. गांधार – गांधार प्राचीन भारत का एक महत्वपूर्ण जनपद (राज्य) था, जो वर्तमान में उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान और पूर्वी अफ़गानिस्तान के कुछ हिस्सों में फैला हुआ था। यह 16 महाजनपदों में से एक था और इसकी राजधानी तक्षशिला थी। गांधार कला, जो कि बौद्ध धर्म से संबंधित एक प्रसिद्ध कला शैली है, वह भी इसी क्षेत्र से जुड़ी है।

गांधार का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है, जहां गांधारी, धृतराष्ट्र की पत्नी और कौरवों की माता, गांधार की राजकुमारी थीं।

2. गांधार के घोड़े – ‘शालिहोत्र संहिता’ नाम के प्राचीन ग्रंथ में 48 प्रकार के घोड़ों का उल्लेख है, जिनमें से कुछ घोड़े गांधार क्षेत्र से संबंधित थे।

3. साहंजनी – साहंजनी नगर का उल्लेख जैन धर्म में भी मिलता हैं जिसके राजा महाचंद थे।

इस भाग में इतना ही

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